पानीपत। जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा क्लेम खारिज करने के एक मामले में उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि बिल में मामूली कमी होने पर क्लेम का दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
आयोग ने कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ 78,572 रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। मानसिक उत्पीड़न के लिए 11 हजार और वाद खर्च के तौर पर 5,500 रुपये भी देने के आदेश दिए हैं। पानीपत के मोहित ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उसने स्टार हेल्थ बीमा कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले रखी थी, जो 29 जनवरी 2022 से 28 जनवरी 2023 तक वैध रही और बाद में इसका नवीनीकरण भी कराया गया। जनवरी 2023 में उनके पैर और टखने में अचानक गंभीर दर्द और सूजन हो गई, जिसके बाद उन्होंने पहले पानीपत के अस्पताल में जांच कराई और फिर डॉक्टर की सलाह पर दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती होकर ऑपरेशन करवाया। इस इलाज पर लगभग 1.20 लाख रुपये खर्च हुए।
बीमा कंपनी से कैशलेस सुविधा और बाद में खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने दस्तावेजों में विसंगतियों और तथ्यों को छुपाने का आरोप लगाते हुए क्लेम खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी द्वारा बताई गई विसंगतियां मामूली थीं और ये मामले के मूल तथ्यों को प्रभावित नहीं करती थीं।
आयोग ने बीमा कंपनी की कार्रवाई को अनुचित ठहराते हुए आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को 78,572 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा की जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर किया जाए, अन्यथा बढ़ी हुई दर से ब्याज लागू होगा और आगे कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। ब्यूरो