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हरियाणा समेत चार राज्यों को ऑक्सीजन दे रहे पानीपत में सिर्फ आधी आपूर्ति

अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 08 May 2021 12:55 AM IST
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कुशाग्र मिश्रा
पानीपत। हरियाणा समेत दिल्ली, पंजाब और राजस्थान को ऑक्सीजन दे रहे पानीपत को जरूरत के अनुपात में आधी ही ऑक्सीजन दी जा रही है। पानीपत के लिए प्रतिदिन ऑक्सीजन का कोटा पांच मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है, जबकि जिले में मांग 10 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की है। नतीजा जिले में कोविड-19 के मरीजों का इलाज कर रहे निजी अस्पतालों में हाहाकार मचा है। निजी अस्पतालों को उनकी मांग के अनुपात में महज 30 से 35 फीसदी ऑक्सीजन ही मिल पा रही है। हालात यह हैं कि ऑक्सीजन खत्म होने के कुछ घंटे पहले ही अस्पताल हाथ खड़े करते देते हैं। परिजनों को अपने मरीज को डिस्चार्ज कराकर कहीं और ले जाने के लिए कह दिया जाता है।
जिले में कोविड का इलाज कर रहे बड़े निजी अस्पतालों को रोज 60 से 100 ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत है। एक सिलेंडर में सात क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन होती है। इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) के ऑक्सीजन बेड और वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों को छोड़ दें तो एक सामान्य ऑक्सीजन बेड पर भर्ती कोविड के मरीज की आवश्यकता के अनुसार भी इस वक्त ऑक्सीजन की आपूर्ति बहुत कम है। डॉक्टरों के अनुसार एक सामान्य ऑक्सीजन बेड पर अगर 13 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से कोविड मरीज को ऑक्सीजन दी जाए तो सात क्यूबिक मीटर का सिलिंडर ढाई घंटे में खत्म हो जाएगा। वहीं अगर मरीज वेंटिलेटर पर है तो उसे 40 से 60 लीटर प्रति मिनट के हिसाब ऑक्सीजन देनी पड़ सकती है, ऐसे में उसका सात क्यूूबिक मीटर का सिलिंडर एक घंटे में खत्म हो जाएगा।

कोविड अस्पतालों में भर्ती 1016 में से 493 संक्रमितों को ऑक्सीजन की जरूरत
शुक्रवार को जिले के कोविड अस्पतालों में कोरोना संक्रमित 1016 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इनमें से 493 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत है। इनमें से 304 मरीज सामान्य ऑक्सीजन बेड पर हैं, जिन्हें ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत नहीं है। वहीं 156 मरीज आईसीयू और 33 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इन्हें अधिक ऑक्सीजन की जरूरत है।
24 घंटे ऑक्सीजन देनी पड़ जाए तो करीब 1.62 करोड़ लीटर की रोज होगी जरूरत
सभी मरीजों को 24 घंटे ऑक्सीजन देने की जरूरत नहीं होती है, लेकिन अगर ऐसी जरूरत पड़ जाए तो इस वक्त पानीपत में ऑक्सीजन बेड, आईसीयू और वेंटिलेटर पर चल रहे मरीजों को प्रति मिनट ऑक्सीजन की मात्रा के मुताबिक एक से 1.62 करोड़ लीटर ऑक्सीजन की रोज जरूरत होगी। ऐसी स्थिति आई तो पूरे हरियाणा के लिए इस वक्त पानीपत में बनाई जा रही 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भी कम पड़ जाएगी। सामान्य ऑक्सीजन बेड पर भर्ती 304 मरीजों को प्रति मिनट 10 से 15 लीटर ऑक्सीजन देने पर 44 से 66 लाख लीटर, आईसीयू में भर्ती 156 मरीजों को प्रति मिनट 30 लीटर ऑक्सीजन देने पर करीब 67 लाख लीटर और वेंटिलेटर पर भर्ती 23 मरीजों को 40 से 60 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन देने पर 19 से 29 लाख लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होगी।
बोले डॉक्टर
सभी मरीजों को नहीं होती हर वक्त ऑक्सीजन की जरूरत
हर संक्रमित मरीज को 24 घंटे ऑक्सीजन देने की जरूरत नहीं होती है। मरीज का ऑक्सीजन लेवल नीचे आने पर ही ऑक्सीजन दी जाती है और फिर लेवल सामान्य होने पर हटा ली जाती है।
-डॉ. अमित कुमार, सिविल अस्पताल
24 घंटे तो कुछ को सोते वक्त होती है अधिक जरूरत
कोई मरीज क्रिटिकल केयर में हैं तो उसे हर वक्त ऑक्सीजन चाहिए। वहीं कुछ मरीज ऐसे भी होते हैं, जिनका ऑक्सीजन लेवल सोते वक्त गिर जाता है, ऐसे में इन्हें तब ऑक्सीजन देने की जरूरत होती है। हर मरीज के हिसाब से प्रति मिनट ऑक्सीजन की मात्रा तय की जाती है। -डॉ. शोभित गोयल, शोभित अस्पताल
पानीपत में रोज 260 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का किया जा रहा उत्पादन
पानीपत रिफाइनरी में रोज करीब 260 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा रहा है। इसमें सबसे ज्यादा 140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दिल्ली को दी जा रही है। 20-20 मीट्रिक टन पंजाब और राजस्थान को भेजी जा रही है। 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरे हरियाणा में की जा रही है, जिसमें पानीपत के हिस्से में महज पांच मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही आ रही है।
वातावरण में महज 21 फीसदी ही ऑक्सीजन होती है
वातावरण में महज 21 फीसदी ऑक्सीजन ही होती है। बाकी 78 फीसदी नाइट्रोजन और एक फीसदी में आर्गन, हीलियम, नियोन, क्रिप्टोन, जीनोन आदि गैस होती हैं। जबकि मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन 98 फीसदी तक शुद्ध होती है।
पानीपत का 5 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का कोटा निर्धारित किया है। निजी अस्पतालों में करीब 10 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग है। जितनी ऑक्सीजन मिल रहे है, उतनी अस्पतालों को दी जा रही है।
-डॉ. विवेक चौधरी, जिला परिषद सीईओ
ऑक्सीजन की बहुत दिक्कत है, कभी पांच तो कभी छह मीट्रिक टन ऑक्सीजन जिला प्रशासन की ओर से दी जा रही है, लेकिन मांग दोगुनी है। नहीं मिलने पर अस्पतालों के लिए इलाज करना मुश्किल होगा।
-डॉ. वेद प्रकाश, प्रधान, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन पानीपत
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