आईएसबीटी दिल्ली में कंडक्टर सुंदर सिंह की कथित प्रताड़ना से आक्रोशित रोडवेज कर्मचारियों ने रोडवेज का चक्का जाम कर दिया और किसी भी बाहरी डिपो की बस को डिपो के अंदर दाखिल नहीं होने दिया गया। वहीं पानीपत डिपो की बस को भी बाहर नहीं जाने दिया गया। रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के चलते यात्री पूरा दिन बसों को लेकर भटकते रहे। वहीं यूनियन ने वीरवार देर शाम को अनिश्चितकालीन हड़ताल को मांगों को माने जाने पर वापस ले लिया।
रोडवेज की सभी यूनियन व बाकी कर्मियों ने वीरवार को आईएसबीटी दिल्ली में कंडक्टर सुंदर सिंह निवासी छारा झज्जर की स्थानीय अधिकारियों की कथित प्रताडना से मौत की सूचना मिलते ही पानीपत रोडवेज डिपो के दो नंबर गेट पर बस अड़ा दी और एक नंबर गेट को घेरकर सरकार व अधिकारियों विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।
सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेश खजांची राजपाल, जिला नेता अनिल कुंडू समेत अन्य यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि नोटबंदी के दौरान अधिकारी कंडक्टरों को प्रताड़ित कर रहे हैं और अपने काले धन को सफेद करने में लगे हुए हैं। कंडक्टर सुंदर सिंह को तीन बार प्रताड़ित किया गया। ऐसे में उसकी मौत हो गई। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करती है तो रोडवेज का चक्का जाम रहेगा।
यात्री दिनभर रहे परेशान
रोडवेज यूनियन ने वीरवार सुबह ही डिपो का चक्का जाम कर दिया। बस बंद होने ही यात्रियों की परेशानी शुरू हो गई। यात्री अपने गंतव्य को जाने के लिए दिनभर भटकते रहे। रोडवेज यूनियन नेताओं ने बाहरी बसों को डिपो में भी प्रवेश नहीं करने दिया गया। ऐसे में दूसरे प्रदेशों की बसें जीटी रोड पर ही खड़ी हुई। जिसका खामियाजा दूसरे लोगों को भी उठाना पड़ा। यात्री अनिल व राजेश ने बताया कि रोडवेज की बस में दिल्ली जा रहे थे, लेकिन पानीपत डिपो के चालक ने इससे आगे जाने से मना कर दिया। वह काफी देर से बस का इंतजार कर रहा है, लेकिन पीछे से कोई बस नहीं आ रही।
डिपो के कर्मी वीरवार को अचानक हड़ताल पर चले गए। जिसके चलते कुछ बसों की आवाजाही नहीं हो सकी। यूनियन नेताओं ने परिवहन मंत्री के सामने अपनी मांगों को रखा है। परिवहन मंत्री के आश्वासन के बाद यूनियन नेताओं ने शुक्रवार की हड़ताल वापस ले ली है। डिपो की सभी बसें शुक्रवार को सामान्य रूप से चलेंगी।
संजय कुमार, यातायात प्रबंधक, रोडवेज डिपो पानीपत।