बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का बिगुल फूंकने वाली हाली की धरती। प्रधानमंत्री का यहीं से बेटी बचाने की भीख मांगना। इन सबके बावजूद 108 दिन की परी का मां के लिए तरसना। चार दिन में दो बार डीएनए टेस्ट। सवाल आज भी वही। आखिर परी के अपने कौन? वे उसको अपनाने को क्यों नहीं तैयार? आरोपकर्ता महिला हाईकोर्ट के आदेश पर वीरवार को डीएनए टेस्ट कराने को साथ तो गई, पर परी को छूना तो दूर करीब से देखा तक नहीं।
प्रशासन और पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश पर आरोपकर्ता महिला कविता और उसके पति अमित का बच्ची के साथ डीएनए टेस्ट के सैंपल कराकर चैन की सांस ली। इतनी दौड़ धूप के बावजूद परी फिर से सिविल अस्पताल की उसी नर्सरी में पहुंच गई, जहां रहकर 108 दिन से मां की गोद का इंतजार कर रही है।
सिविल अस्पताल में पल रही बच्चा परी को वीरवार को हाईकोर्ट के आदेश पर डीएनए को लेकर चंडीगढ़ पीजीआई ले जाया गया। उनके साथ बच्चा बदलने की आरोपकर्ता महिला कविता और उसके पति अमित निवासी रामनगर भी गई।
प्रशासन की ओर से नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेट हरिओम अत्री और पुलिस की तरफ से डीएसपी शहर दलबीर सिंह ने अमले की अगुवाई की। उनके साथ बस अड्डा चौकी प्रभारी भीम सिंह, सिविल अस्पताल के डॉक्टर डॉ. अंबुज जैन और नर्स पारुल और ललिता पहुंचीं।
पीजीआई चंडीगढ़ में वीरवार को परी और दंपति का डीएनए के सैंपल लेने के लिए दो बार लाइन में लगना पड़ा। बताया जा रहा है कि प्रशासन और पुलिस की टीम दोपहर साढ़े 12 बजे पीजीआई चंडीगढ़ पहुंची।
डीएनए को लेकर लाइन में लगे तो कुछ ही देर बाद पीजीआई का लंच ब्रेक हो गया। उसके बाद टीम बच्ची को लेकर वापस आ गई। वे उनको लेकर दो बजे फिर गए और करीब डेढ़ घंटे तक डीएनए के सैंपल लिए और वे साढ़े तीन बजे सैंपल देकर बाहर निकले।
डीएसपी शहर दलबीर सिंह और चौकी प्रभारी भीम सिंह ने हाईकोर्ट में डीएनए कराने का जवाब दाखिल किया।
बच्चा बदलने का आरोप लगाने वाली रामनगर निवासी कविता के ससुर राजबीर ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि उसका लड़का अमित और उसकी बहू कविता डीएनए टेस्ट कराने को वीरवार सुबह ही चले गए थे।
वे देर शाम को वापस पहुंचे। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेशों की पालना की और अब रिपोर्ट का इंतजार है। वे रिपोर्ट के आधार पर अगला कदम उठाएंगे।
प्रशासन ने मामला बढ़ने पर 10 सितंबर को लघु सचिवालय में बैठक की और इस बैठक में रामनगर की आरोप लगाने वाली कविता के साथ नैन और ऊंचा समाना निवासी कविता को भी शामिल किया।
उनके बच्चों को भी 18 जून को सिविल अस्पताल की नर्सरी में होना पाया गया था। प्रशासन ने इसके बाद 28 जून को डीएनए के सैंपल लेने को तारीख मिल गई। बच्चा बदलने का आरोप लगाने वाली रामनगर निवासी कविता नोटिस देने के बाद भी डीएनए कराने को नहीं पहुंची।
प्रशासन और पुलिस ने मामले को देखते हुए 28 जून को बच्ची परी और नैन और ऊंचा समाना निवासी कविता का डीएनए करा दिया गया। रामनगर निवासी कविता के पति अमित की याचिका पर 29 सितंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई की गई।
हाईकोर्ट ने एक अक्तूबर को बच्ची और आरोपकर्ता दंपति का चंडीगढ़ में डीएनए टेस्ट कराने का फैसला दिया और प्रशासन और पुलिस को भी इसके आदेश दिए।
सिविल अस्पताल में 18 जून से बच्चा बदलने को लेकर हंगामा चल रहा है। रामनगर निवासी कविता ने डॉक्टरों और स्टाफ नर्स पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया था।
उसने बताया कि उसकी 17 जून को सिविल अस्पताल में डिलीवरी हुई थी। उसको उस वक्त बच्ची पैदा होने की जानकारी दी गई थी लेकिन उसको अगले दिन दूध पिलाने को लड़का दिया गया। उसके हाथ पर उसका और उसके पति अमित के नाम का टैग बंधा था।
थाना शहर पुलिस ने उसकी शिकायत पर डॉक्टर और स्टाफ नर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। परिजनों ने डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। पुलिस ने इसको लेकर कई बार तारीख ली लेकिन रामनगर निवासी कविता मधुबन के बजाय चंडीगढ़ डीएनए कराने की मांग पर अड़ गई।
हाईकोर्ट के आदेश पर वीरवार को बच्ची और रामनगर निवासी आरोपकर्ता दंपति का पीजीआई चंडीगढ़ में डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल ले लिए हैं। पुलिस को अब रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
भीम सिंह, प्रभारी, चौकी बस अड्डा पानीपत।