टेक्सटाइल नगरी पानीपत को कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) की सौगात मिली है और करीब 19 करोड़ के प्रोजेक्ट को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।
सेंटर सेक्टर-25 पार्ट-टू में बनाया जाएगा और इसके लिए 2218 वर्गमीटर जमीन भी मिल गई है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर के बाद पानीपत के लघु और मध्यम उद्योग के साथ टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा सहारा मिलेगा।
इसके बाद पानीपत की स्माल इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल इंडस्ट्री चीन और ताईवान समेत कई देशों के साथ मुकाबला कर सकेगा। भारत सरकार ने पानीपत में टेक्सटाइल मशीनरी उद्योग के विकास के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाने की स्वीकृति दी। उद्योग भवन नई दिल्ली में 28 जुलाई मंगलवार को ही सेंटर बनाने की हरी झंडी मिली है।
पानीपत स्माल इंजीनियरिंग वर्कशाप एसोसिएशन ने इस पर मंत्रालय के आला अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। एसोसिएशन के प्रधान सुखबीर सिंह मलिक ने बताया कि इसमें भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय करनाल के निदेशक विजय कुमार, इंडस्ट्रीज के मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह और इंडस्ट्रीज निदेशक चंद्र प्रकाश का विशेष योगदान है।
वे बुधवार को स्काईलार्क में मीडिया के सामने भी रूबरू हुए। उन्होंने बताया कि पानीपत टेक्सटाइल मशीनरी डेवलपमेंट सेंटर को कॉमन फैसिलिटी सेंटर की मंजूरी मिलना बड़ी बात है। इस मौके पर चेयरमैन हरचरण सिंह, उप प्रधान सतबीर सिंह, कोषाध्यक्ष मुकेश मदान, सचिव राजेंद्र शर्मा, जोगेंद्र जौरासी, हरसिमरत सिंह और गुरदीप सिंह मौजूद रहे।
कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाने के लिए 18.85 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। इसमें से 12 करोड़ रुपये भारत सरकार, डेढ़ करोड़ रुपये प्रदेश सरकार देगी और इसकी शेष राशि पानीपत टेक्सटाइल मशीनरी डेवलपमेंट सेंटर की ओर से लगाई जाएगी। सेंटर सेक्टर-25 पार्ट-2 में 2218 वर्गमीटर क्षेत्र में बनाया जाएगा।
इसमें सरकारी अनुदान से अत्याधुनिक मशीनें मंगवाई जाएंगी। इससे पानीपत के टेक्सटाइल इंजीनियरिंग वर्कशाप के उद्यमियों को आधुनिक मशीनरी के पार्ट्स बनवाने में सहूलियत मिलेगी।
इसके अतिरिक्त पानीपत के बेरोजगार युवकों को इन अत्याधुनिक मशीनों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। बीटेक और दूसरी डिग्री करने वाले युवाओं को भी सक्षम बनाया जाएगा। इसके लिए अच्छे प्रशिक्षक भी रखे जाएंगे।
प्रधान सुखबीर मलिक ने बताया कि भारत सरकार के इस कदम से पारंपरिक काम में तेजी आएगी और प्रधानमंत्री का मेक इन इंडिया का मंत्र साकार होगा।
इस परियोजना से पानीपत क्षेत्र के सभी टेक्सटाइल इंजीनियरिंग मैन्यूफैक्सर्स उद्यमी दिल से जुड़े हैं और उनका मानना है कि अब ग्लोबल स्पर्धा के युग में वे अब तकनीक के क्षेत्र में पीछे नहीं रहेंगे।
पानीपत में स्माल इंजीनियरिंग वर्कशॉप का विशेष स्थान हैं और एसोसिएशन से पानीपत के 118 स्मॉल एंड सूक्ष्म इंजीनियरिंग उद्यमी पंजीकृत हैं। यहां से दूसरी इंडस्ट्री को काम प्रमुखता के साथ किया जाता है।
पानीपत को कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सौगात ऐसे ही नहीं मिली है। इसके मिलने में पानीपत स्माल इंजीनियरिंग वर्कशाप एसोसिएशन का विशेष सहयोग रहा। मंत्रालय की ओर से सेंटर के लिए 20 सदस्य बनाए जाने थे।
एसोसिएशन ने मंत्रालय के सामने तीस सदस्यों को बात रखी। एसोसिएशन ने हुडा से जमीन लेने के लिए दो साल की कड़ी मेहनत की। इसके लिए रोहतक और चंडीगढ़ हुडा कार्यालय के लगातार चक्कर भी लगाए।
एसोसिएशन पदाधिकारियों व सदस्यों के आपसी सहयोग व मेहनत के चलते आज सेंटर पानीपत की झोली में है।
जॉब वर्क के लिए खर्च और मेहनत कम
पानीपत में कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनने के बाद टेक्सटाइल के जॉब वर्क बनाने का खर्च कम होने के साथ मेहनत भी कम होगी। इससे पहले उद्यमियों को जॉब वर्क के लिए फरीदाबाद व गुड़गांव जाना पड़ता था। इसमें समय के साथ पैसे की भी बरबादी होती थी।
कई उद्यमियों ने काम को देखते हुए सीएमसी, वीएमसी और लेदर कटिंग मशीन दूसरे देशों से मंगवानी पड़ती थी। इन मशीनों की कीमत बहुत ऊंची है।
ऐसे में उद्यमियों को मशीन लाने के लिए लोन का सहारा लेना पड़ता था। वहीं सेंटर के न होने पर पानीपत की इंडस्ट्री को चाइना, कोरिया, इटली व ताइवान से मुकाबला करना पड़ रहा था। यहां से आने वाली मशीन पानीपत की इंडस्ट्री को लगातार प्रभावित कर रही थी।