महिला पुलिस थाने में आपसी विवाद में ननद और भाभी समेत एक छोटी बच्ची को हवालात में बंद रखने का मामला भड़क गया है और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मामले की रिपोर्ट मांगी है।
मामले की जांच अधिकारी हवलदार मामला भड़कने पर बेहोश हो गई। उनको उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल होना बताया है।
पीएलएसए को जांच अधिकारी के न मिलने पर खाली हाथ बैरंग लौटना पड़ा। महिला थाने की एडिश्नल इंचार्ज ने मामले में अपनी सफाई दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्रवाई के चलते इस मामले में किसी पर भी गाज गिरती दिखाई दे रही है।
वहीं पुलिस के आला अधिकारी भी दिनभर मामले को दबाने में लगे रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और सीजेएम परमिंदर कौर ने महिला पुलिस थाने में ननद और भाभी और एक बच्ची को हवालात में बंद करने के मामले को गंभीरता से लिया।
उन्होंने महिलाओं और बच्चों के हक की बात को उठाते हुए डीएलसीए के पैनल में एडवोकेट विकास को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए। डीएलएसए के एडवोकेट विकास रोहल सोमवार को महिला थाने में पहुंचे और पूरे मामले की रिपोर्ट लेनी चाहिए।
उन्होंने महिला थाना की एडीशनल इंचार्ज कविता से बात की और मामले की रिपोर्ट मांगी। एडिशन इंचार्ज ने जांच अधिकारी हवलदार पूनम के मामला उछलने के बाद बेहोश होने पर अस्पताल में दाखिल होना बताया। उन्होंने एडवोकेट विकास रोहल के सामने पूरा मामला रखा।
महिला पुलिस थाना की ओर से बीती देर रात को दोनों महिलाओं पर 107 और 151 के तहत कल अंदर कर दिया और दोनों को देर रात को मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर दिया। पुलिस का यह कदम भी दोनों महिलाओं और बच्चों को हवालात में बंद करने को सवालों के घेरे में है।
कानून विशेषज्ञों की माने तो पुलिस शांति भंग होने की स्थिति और दोनों को बराबर का कसूरवार पाने पर सीआरपीसी की धारा 107 और 151 के तहत कार्रवाई कर सकती है। सीआरपीसी यह भी कहती है कि इसमें किसी को भी हवालात में बंद नहीं किया जा सकता।
उनको चेतावनी दी जा सकती है या फिर अपने सामने बैठाया जा सकता है। आरोपियों को तुरंत मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना होता है। उनके जमानती न मिलने पर उनके पर्सनल बांड पर भी जमानत पर छोड़ा जा सकता है। यह केस छह माह तक चलता है और दोनों पक्षों में शांति स्थापित होने पर खुद खत्म हो जाता है।
अमर उजाला ने उठाया था मामला
प्रदेश में हाल ही में खुले महिला थाने में महिला व उनके छोटे बच्चे का हवालात में बंद करने का मामला गंभीर है। अमर उजाला माई सिटी ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। जिस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और सीजेएम ने गंभीरता से लिया और मामले की जांच कराने के आदेश दिए।
मामला महिला थाने से जुड़ा हुआ है। कच्चा कैंप निवासी राजेश ने महिला पुलिस थाने में पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उसने बताया था कि उसके साले मनीष व मनीष की पत्नी आरती के बीच मनमुटाव चल रहा था।
आरती ने मनीष की शिकायत महिला थाने में दे दी। वह अपने साले मनीष व अपनी पत्नी मीना के साथ चला गया। वहां पर दोनों के बीच समझौता हो गया। आरोप है कि उनमें कुछ कहासुनी होने पर पुलिसकर्मियों ने उसकी पत्नी, उसके साले की पत्नी व उसकी छोटी बच्ची को हवालात में बंद कर दिया। पुलिसकर्मियों ने उसकी पत्नी मीना की तबीयत बिगड़ने पर छोड़ा।
सीजेएम परमिंदर कौर बच्चों व महिलाओं पर अत्याचार को सहन नहीं करती और उन्होंने महिला थाने में दो महिलाओं व एक बच्चे को बंद करने के मामले की जांच करने के आदेश दिए। वे महिला थाने में गए थे। जांच अधिकारी हवलदार पूनम को मामले के चलते बेहोश होने पर अस्पताल में दाखिल होना बताया गया। एडिशनल एसएचओ ने अपनी सफाई दी है। वे जांच अधिकारी से मिलकर ही पूरे मामले की जानकारी लेंगे और पूरी रिपोर्ट डीएलएसए के सामने रखेंगे।
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