अनाज मंडी में धान की ऑनलाइन खरीद का सिस्टम फेल हो चुका है। ऑनलाइन के नाम पर मार्केट कमेटी के अधिकारी सरकार को भी धोखे में रखे हुए हैं। व्यापारियों ने किसानों की जीरी को पहले की तरह औने पौने दामों में खरीदना शुरू कर दिया है।
स्थानीय अनाजमंडी में अब तक धान का एक दाना भी ऑनलाइन नहीं बेचा गया। सारी धान को लोकल आढ़ती (एक्सपोर्टर के आदमी) ही खरीद कर रहे हैं। इनके द्वारा की गई खरीद के आंकड़े एकत्रित कर कर मार्केट कमेटी के अधिकारी ऑनलाइन कर सरकार को अपनी उपलब्धि बता रहे हैं।
यह है मंडी की हकीकत
मंडी में दोपहर एक बजे धान की बोली शुरू होती है। करीब 35 खरीददारों में से 5 से 7 ही बोली में शामिल होते हैं। इनकी आपसी मिलीभगत के चलते बोली पर कोई भी खुलकर रेट नहीं लगाता। एक या दो घंटे तक खरीद कर उस दिन का भाव तय कर लिया जाता है।
आगे धान की मांग न होने का बहाना बनाकर बोली को बीच में ही छोड़ देते हैं। इसके बाद किसानों के धान के मनमाना रेट लगा दिया जाता है। मंडी के 30-35 व्यापारी मंडी में फैल जाते हैं और धान की मांग न होने का दावा कर धान मनमाने ढंग से खरीद लेते हैं।
किसान भी मजबूरी में धान बेच देता है। सरकार के नियम के मुताबिक सुबह 10 से शाम पांच बजे तक धान की खुली बोली कर खरीदने के आदेश हैं। लेकिन, मार्केट कमेटी के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते दोपहर एक बजे बोली शुरू होकर दो या तीन बजे तक होती है।
किसानों के सपने हो रहे चकनाचूर
मतलौडा अनाज मंडी में करीब 135 आढ़तियों की दुकानें है। यहां पर धान के सीजन में 250 करोड़ रुपये का बिजनेस होता है। करीब 20 हजार से ज्यादा किसान यहां अपनी फसल बेचते हैं। लेकिन, मंडी में किसानों के सपने चकनाचूर हो रहे हैं।
मंडी में ऑनलाइन सिस्टम लागू करने के लिए सरकार ने कमेटी कार्यालय में करीब 15 लाख रुपये से लैब स्थापित की थी। यह बेकार हो रही है। करीब 15 कर्मचारी अतिरिक्त लगाए गए थे। वो भी यहां टाइम पास कर रहे हैं। किसान रामफल, मामन, सतबीर, जोगेंद्र
ने बताया कि बोली पर कोई व्यापारी खुश नहीं है। एक घंटे बाद धान की मांग न होने की बात कहकर बोली बंद कर दी जाती है।
मंडी में नियमित और नियमों के अनुसार ही धान की खरीद की जा रही है। किसानों के साथ किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जा रही। आढ़ती ही धन बिकवाने के लिए आगे नहीं आ रहे।
रणजीत सिंह, मंडी सुपरवाइजर, मार्किट कमेटी मतलौडा।