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न खट्टा, न मीठा, बजट रहा मिलाजुला

Thu, 02 Feb 2017 12:16 AM IST
amar ujala beuro panipat
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x - फोटो : amar ujala
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नोटबंदी के बाद मोदी सरकार का पहला आम और रेल बजट एक साथ आया। लोग बजट के लिए दिनभर टीवी की स्क्रीन पर आंखें गड़ाए बैठे रहे। लोगों ने बजट को न खट्टा और न ही मीठा बताया। इनकम टैक्स स्लैब में परिवर्तन करने पर मध्यम लोगों के साथ दूसरे लोगों को कुछ राहत जरूर महसूस हुई। अर्थशास्त्रियों की मानें तो टैक्स स्लैब में बदलाव लाने पर ढाई से पांच लाख की इनकम वाले लोगों को 12 हजार के करीब वार्षिक फायदा होगा। हालांकि, उन्होंने भी इसको मिलाजुला बजट बताया।
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संयुक्त व्यापार मंडल के प्रधान दर्शनलाल का कहना है कि अबकी बार बजट में पांच लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं लिया जाने का प्रावधान करना चाहिए था। लेकिन, बजट में ढाई लाख से तीन लाख तक कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा। इससे लोगों को बहलाया जा रहा है। यह बजट आस से परे ही रहा।


दुकानदार गुलशन बवेजा का कहना है कि तीन लाख से ऊपर कैश लेन-देन पर रोक लगाई गई है। इससे सरकार अपने कैशलेस मोटिव को पूरा कर रही है। इससे व्यापार पर असर पड़ेगा। पांच लाख तक की आय पर टैक्स में छूट की संभावना थी। ऐसा नहीं हो सका। इससे लोगों की आशाओं पर पानी फिर गया है।
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गृहणी नितिका गोयल का कहना है कि बजट से महंगाई कम करने की उम्मीद थी। लेकिन, महंगाई को कम करने के लिए बजट में कुछ विशेष घोषणा नहीं हुई है। सरकार से हम लोगों ने बहुत उम्मीद लगाई हुईं थी, लेकिन बजट में आशा के अनुरूप कोई घोषणा नहीं की गई। इससे महंगाई कम होने की संभावना समाप्त हो गई है।


गृहणी ज्योति मित्तल का कहना है कि गृहणियों को बजट में खासतौर पर महंगाई से ही लेना देना होता है। अगर बाजार आने के बाद घरों में उपयोग होने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं के रेट बढ़ जाते हैं तो अपने आप रसोई का सारा बजट बिगड़ जाता है। इस बार महंगाई से राहत देने के लिए कोई खास घोषणा नहीं की गई।


गृहणी अनु आहूजा का कहना है कि बजट से रसोई पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। किसी भी उत्पात के रेट बढ़ने पर लोग सबसे पहले रसोई का बजट ही कम करने की सोचते हैं। इस साल का बजट पेश होने के बाद अब उन्हें भी अपनी रसोई की चिंता सबसे पहले सताने लगी है। बजट से कोई राहत नहीं मिली है।


पूर्व स्पीकर एवं इनेलो नेता सतबीर सिंह कादियान का कहना है कि सरकार ने बजट में किसानों और दूसरे लोगों को कुछ खास फायदा नहीं पहुंचाया है। बजट में सरकार की नीति और नीयत दोनों साफ हो गई हैं। इस बजट के बाद लोगों को महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद बहुत कम है।


स्टूडेंट रिया का कहना है कि बजट में कैशलेस की ओर ध्यान दिया गया है। इससे देश में भ्रष्टाचार कम होगा। बाजार में विभागों में जितना अधिक कैशलेस ट्रांजेक्शन पर जोर दिया जाएगा। देश से भ्रष्टाचार उतनी ही तेजी से कम होगा। सरकार ने इस भ्रष्टाचार पर ही लगाम लगाने की कोशिश की है।


स्टूडेंट आंचल गर्ग का कहना है कि सरकार ने 2017 के बजट में तीन लाख से अधिक रुपये के लेन-देन पर रोक लगा दी है। बजट में उच्च शिक्षा के लिए यूजीसी में सुधार की घोषणा की है। इससे शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए अनेक रास्ते निकलेंगे। साथ ही लेन-देन की सीमा निर्धारित करन अच्छा है।


हैंडलूम एक्सपोर्ट मेन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने कहा कि सरकार के बजट में एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा। टैक्स प्रतिशत की छूट कम करने से उद्योगपतियों को फायदा होगा। सरकार की सोच जल्द ही सामने आएगी। यह उद्यमियों को फायदा पहुंचाने वाला बजट साबित हो सकता है।


उद्योगपति विकास गोयल का कहना है कि सरकार ने बजट में मध्यम वर्ग के लिए तो राहत दे दी है। लेकिन, उद्योग चलाने वाले लोगों के लिए कुछ भी राहत भरा कदम इस बजट में नहीं उठाया गया है। इससे बजट से और परेशानियां पैदा हो चुकी हैं। इसका असर जल्द ही बाजार में देखने को मिलेगा।


किसान यूनियन के उपप्रधान बिंटू मलिक का कहना है कि बजट में किसानों की आय पांच साल में दोगुना करने की बात कह है। दूसरी ओर किसानों के कर्ज के लिए दस लाख करोड़ का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन, सरकार ने किसानों के लिए फसलों में काम आने वाले उपकरण, बीज और खाद पर कुछ काम नहीं किया।


समाजसेवी रमेश माटा का कहना है कि बजट में अबकी बार बेघरों के लिए साल 2019 तक एक करोड़ घर बनाने की घोषणा तो अच्छी हुई है। लेकिन, जब तक इस घोषणा पर काम शुरू नहीं होता, तब तक यह घोषणा मात्र ही रहेगी। सरकार को जल्द से जल्द गरीबों के लिए कुछ बढ़कर करना चाहिए।


भाजपा जिला अध्यक्ष प्रमोद विज का कहना है कि बजट में वर्ष 2025 तक टीबी पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर प्रगति है। सबसे पहले देश में स्वास्थ्य बेहतर होनी जरूरी है। सरकार का बजट सराहनीय है और हर व्यक्ति को ध्यान में रखकर बनाया गया है।


दिलबाग का कहना है कि रेल बजट में टिकटों की बुकिंग पर ध्यान दिया है। रेल के किराए भी कम करने चाहिए थे। माल ढुलाई का रेट बढ़ा देना चाहिए था। यात्रियों के किराए को कम करना था। बजट में सिर्फ दिखावे की घोषणा है। पिछले बजट में की गई कई घोषणाओं को ही नया रूप दिया गया है।


जितेंद्र कुमार का कहना है कि रेल बजट में आईआरसीटीसी से टिकट बुक कराने पर सर्विस चार्ज नहीं लगाने का प्रावधान है। बजट में 2019 तक सभी ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाने की भी घोषण है। यह पिछले बजट में भी थी। इसे आज तक पूरा नहीं किया गया। सरकार ने केवल खाना पूर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ति की है।

अर्थशास्त्रियों की नजर में बजट

सीए संजय जैन ने बताया कि आम बजट में ढाई से पांच लाख तक की आय में टैक्स की दर 10 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत की है। इससे प्रत्येक व्यक्ति को वार्षिक 12 हजार रुपये का फायदा होगा। 50 लाख से अधिक आय वाले लोगों पर टैक्स के साथ दस प्रतिशत सरचार्ज लगाया है। उनको हर साल डेढ़ से दो लाख रुपये तक का नुकसान होगा। सिगरेट और तंबाकू महंगे किए हैं।


सीए शशि चड्ढा ने बताया कि आयकर की छूट ढाई लाख से बढ़ाकर तीन लाख की गई है। इसके अलावा भी स्लैब में आयकर की छूट दी है। सरकार बजट को लेकर गंभीर है। इससे आम जनता को कुछ राहत तो मिलेगी, साथ ही लोगों को कुछ देना भी होगा। अब टैक्स चोरी करने की गुंजाइश कम होगी। तीन लाख से अधिक का लेन-देन कैश से न करने का फैसला विकास में सहायक होगा।


पूरे परिवार की धड़कन रही तेज
सेक्टर-25 निवासी उद्यमी अश्विनी शर्मा सुबह ही परिवार के साथ बजट देखने लग गए। उनकी आम और रेल बजट के साथ धड़कन तेज होती गई। अश्विनी शर्मा ने बताया कि बजट के बाद घर चलाने के लिए हिसाब-किताब लगाना पड़ेगा। इससे घर पर सीधा पड़ेगा। सरकार को आम जनता के बारे में सोचना चाहिए था।
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