स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सरकारी कॉलेजों में चलाए जाने वाले अभियान को झटका लगा है। अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक बजट नहीं पहुंचा। बजट न मिलने से अभियान की सभी तैयारियां अधूरी है। अधिकारी बजट आने की बाट जोह रहे हैं। फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में अभियान को शुरू करने की योजना बनाई गई थी। अधिकारियों का कहना है कि बजट आने के बाद ही अभियान की तारीख तय की जाएगी।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी सरकारी कॉलेजों में छात्राओं के ब्लड सैंपल लिए जाएंगे। ताकि छात्राओं में हिमोग्लोबिन की कमी का पता लगाया जा सके। जिन छात्राओं में हिमोग्लोबिन की कमी पाई जाएगी, उन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाई दी जाएगी और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान को लेकर स्वास्थ्य अधिकारी गंभीर है और किशोरियों के स्वास्थ्य की सही प्रकार से जांच करने व उन्हें जागरूक कर दवाई देने के लिए जल्द ही टीमें गठित की जाएंगी।
छात्राओं को स्वस्थ रखना ही उद्देश्य
अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग का उदद्देश्य किशोरियों में खून की कमी को दूर करना है। खून की कमी के कारण किशोरियों का सही प्रकार से शारीरिक विकास नहीं हो पाता। जिससे शादी के बाद गर्भ धारण पश्चात बच्चे का भी ठीक प्रकार से विकास नहीं हो पाता। इससे मातृ-शिशू मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी होती है। बढ़ती मातृ-शिशु मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के लिए ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस अभियान को चलाने का निर्णय लिया गया है।
60 प्रतिशत किशोरियों में खून की कमी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 18 से 23 आयु वर्ग की 60 प्रतिशत किशोरियों में खून की कमी है। इस आयु वर्ग की किशोरियां कॉलेज लेवल तक पहुंच जाती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी सरकारी कॉलेजों में इस अभियान को चलाने का निर्णय लिया है।
1870 छात्राओं के ब्लड सैंपल की होगी जांच
अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा पानीपत, इसराना, बापौली व मतलौडा के राजकीय विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाली करीब 1870 छात्राओं के ब्लड सैंपल की जांच की जाएगी। जांच में हिमाग्लोबिन की कमी पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम छात्राओं को दवा देगी और शारीरिक बीमारियों के प्रति जागरूक करेगी। ताकि छात्राएं अन्य को भी इस बारे में जागरूक कर सकें।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी सरकारी कॉलेजों में छात्राओं के ब्लड सैंपल लेने के लिए अभियान चलाया जाना है। इस अभियान के लिए अभी बजट नहीं आया है। बजट आने के बाद अभियान की तारीख तय की जाएगी।
डॉ. मुनीष कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत।