गांव उग्रा खेड़ी में चल रहे धरने में दो बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ गई। हालत बिगड़ती देख दोनों को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में दाखिल कराया गया है। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन पर पहले की अपेक्षा बिजली व पानी कम देने के आरोप लगाया हैं। मामले को देखते उपायुक्त ने आपातकालीन बैठक बुलाई और हालातों की रिपोर्ट ली। अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति के सदस्यों द्वारा मंगलवार सुबह हवन कर सरकार की शुद्धि की कामना की गई। धरने से हटाए गए गुप्तचर विभाग के अधिकारी स्टेडियम के पास डटकर पूरी जानकारी लेते रहे। सुरक्षा के लहजे से सनौली-हरिद्वार रोड पर स्टेडियम के आसपास भारी सुरक्षाबल मौजूद रहा, वहीं जिले के विभिन्न नाकों पर आरएएफ की टुकड़ियां व पुलिस बल तैनात थे।
गांव उग्रा खेड़ी की चौपाल में मंगलवार की सुबह 9.30 बजे हवन का आयोजन किया गया। साढ़े 10 बजे तक चले हवन में सरकार की शुद्धि के लिए प्रार्थना की गई। धरने में मौजूद लोगों को प्रसाद भी बांटा गया। हवन के बाद धरना शांतिपूर्वक तरीके से शुरू किया गया। देखते ही देखते धरने में शामिल होने वालों की संख्या भी बढ़ती गई। गांव जाटल की तरफ से 21 हजार का चंदा कमेटी के अध्यक्ष रामचंद्र डाहर को दिया गया। धरने में महिलाओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है। महिलाओं ने हरियाणवीं गीत गाकर सरकार के खिलाफ रोष भी जताया। गांव कवी, आदियाना, मतलौडा व उग्रा खेड़ी की महिलाएं शामिल हुई, महिलाओं ने नाचकर समा बांधा। दसवें दिन धरने को किसान यूनियन की तरफ से भी भारी समर्थन मिला। यूनियन के जिला अध्यक्ष जयकरण व उपाध्यक्ष बिंटू मलिक ने सरकार पर जाट समाज की मांगे मान लेनी की अपील की। दोपहर तक धरना शांतिपूर्वक चल रहा था, दोपहर 1.30 बजे जब दो बुजुर्ग रोशन लाल निवासी नारा व प्यारे लाल निवासी करहंस की तबीयत बिगड़ गई। दोनों बुजुर्गों को तुरंत उपचार के लिए सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। फिलहाल दोनों की हालत में सुधार है।
उत्तर प्रदेश निवासी मास्टर ऋषिपाल ने धरने को अपना समर्थन दिया। कहा जाट समाज शुरू से ही अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता आया है और जब बात जाट समाज के हितों व उनकी मांगों की आई तो सरकार ने मुंह मोड़ लिया। जिसकी वजह से जाट समाज धरना देने के लिए मजबूर हुआ है। ऋषिपाल ने कहा कि सरकार को जाटों की अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। यदि जाट समाज की मांगों की तरफ शीघ्र ही ध्यान नहीं दिया गया तो उसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। गांव उग्रा खेड़ी के ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा बिजली कट भी बढ़ा दिए गए है। पानी भी कम दिया जा रहा है। 14-14 घंटे बिजली के कट लगाए जा रहे है। गांव के पूर्व सरपंच बिंटू मलिक ने कहा कि प्रशासन ने बिजली व पानी पर्याप्त नहीं दिया तो वे आरक्षण को पीछे छोड़कर गांव के हित के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। इस अवसर पर वेदप्रकाश, सुरेश करहंस, रमेश, रामचंद्र, दिलावर, सूबे सिंह, बलजीत सिंह, राजेंद्र शर्मा, पाला, इंद्र सिंह, लखपत रोड़, महेंद्र, जगदीश व बलवान सिंह मौजूद रहे।
वहीं एसडीएम विवेक चौधरी, तहसीलदार जिवेंद्र मलिक व डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन स्टेडियम से ही धरने स्थल की पूरी जानकारी लेते रहे। इसके अलावा पुलिस द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जिले की सीमाओं व जगह-जगह नाके लगाकर प्रत्येक व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है। साथ ही गुप्तचर विभाग के अधिकारी धरना स्थल की पूरी जानकारी प्राप्त करते रहे। प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के मद्देनजर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
कहीं भी बैठ सकते हैं जाट : देशवाल
जाट संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष सतबीर सिंह देशवाल ने बताया कि गांव उग्रा खेड़ी की चौपाल में चल रहे धरने का आज दसवां दिन है और धरने को 36 बिरादरी का समर्थन प्राप्त हो रहा है। धीरे-धीरे धरने का दायरा भी बढ़ रहा है। कहा जिस दिन चौपाल में बैठने की जगह नहीं कम पड़ जाएगी, उस दिन जाट समाज किसी भी जगह बैठ सकता है, चाहे वो गांव का स्टेडियम ही क्यों न हों?। उनका धरना शांतिपूर्वक रहेगा।