एसडी पीजी कॉलेज में दो दिवसीय अखिल भारतीय मुशायरा एवं विचार गोष्ठी का समापन हाली की शिक्षाओं व संदेशों के साथ हुआ। मुख्यातिथि शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन व विद्वानों ने मशहूर शायर अल्ताफ हुसैन हाली को सच्चा समाज सुधारक बताया और उनकी शिक्षाओं को अपनाने की सीख दी।
कॉलेज में रविवार को आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन रही। इसका आगाज डॉ. इश्तियाक अहमद जिल्ली निदेशक शिब्ली अकादमी आजमगढ़ ने किया। उनके अलावा हरियाणा उर्दू अकादमी की निदेशिका कुमुद बंसल, निगम आयुक्त वीना हुड्डा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद विज, एसडी कॉलेज प्रबंधकारिणी के प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने मेहमानों और विद्वानों का पुष्प गुच्छ और शाल भेंटकर भव्य स्वागत किया। मंच संचालन रचनाकार राजीव रंजन ने किया। साहित्य समाज को नया रूप देता है और एक कवि अपने शब्दों से समाज को जागरूक करता है। उनकी शिक्षा के दौरान साहित्य में इतनी रुचि नहीं थी, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ साहित्य में रुचि भी आने लगी।
कविता जैन ने कहा कि साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा नए-नए पुरस्कारों की घोषणा की गई है और साहित्यकारों को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन मिले इसके लिए पुरस्कारों की राशि मेें भी वृद्धि की गई है। सरकार द्वारा हरियाणा की संस्कृति को आगे बढाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में महिला शायरों के मुशायरे का आयोजन भी करवाया जाएगा। उन्होंनें ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए हरियाणा उर्दू अकादमी और कॉलेज प्रबंधन को भी भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। मंत्री कविता जैन ने कार्यक्रम में उपस्थित उर्दू साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
हरियाणा उर्दू अकादमी की निदेशक कुमुद बंसल ने कहा कि अकादमी में पारदर्शिता के साथ कार्य किया जा रहा है। नवलेखकों को आगे बढ़ने के लिए पूरा अवसर प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि हाली की नज्मों ने समाज में औरत का सम्मान देने और उनको हुनरमंद होने की बात कही। डॉ. इश्तियाक अहमद जिल्ली निदेशक शिब्ली एकेडमी आजमगढ़ ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा की हाली एक अच्छे शायर, चिंतक और विचारक थे और समय की नाड़ी और उसकी गति पर उनकी सदैव दृष्टि रही। मिर्जा गालिब के शिष्य होने का दायित्व उनकी वैचारिकता में झलकता भी है और उनके लेखन में मुखर भी दिखायी देता है। डॉ. ओमेर मंजर लखनऊ ने अपने वक्तव्य में कहा की हाली ने कभी खुद के लिए कुछ नहीं जोड़ा बल्कि जो कुछ उनके पास था वह सब बांट दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा हमारी रानी है तो उर्दू हमारी राजकुमारी है।
डॉ. शहनवाज फैयाज दिल्ली ने हाली द्वारा लिखे गेर पत्रों के माध्यम से उनके शिक्षा के प्रति विचारों को सबके सामने रखा। उन्होंने कहा कि हाली साहेब औरतों की तालीम और आजादी के तलबगार थे। तालीम कि असल गुफ्तगू हाली साहेब से शुरू होती है और इसमें लड़कियां भी किसी से कमतर नहीं है। हाली के ख्वाबों का हिंदुस्तान तभी बनेगा जब हम शिक्षा को लेकर वाकई संजीदा हो जाएंगे।
डॉ. रहमान मुसब्बिर जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली ने अपनी तकरीबात में कहा की हाली ने हमेशा देश कि एकता पर जोर दिया। डॉ. शम्स तबरेजी ने कहा की उर्दू आलोचना का रास्ता हाली ने ही हमें दिखाया है। अलिस्बा लखनऊ ने पानीपत कि सरजमी पर खुद को पा कर फक्र का अनुभव किया और कहा कि हाली हमेशा बराबरी कि बात करते थे। प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा की हाली साहेब महिलाओं कि शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के पक्षधर थे और आज कि सारी समस्याएं और उद्देश्य उनकी शायरी में पूरा-पूरा स्थान पाते हैं। इस मौके पर डॉ. आरपी सैनीए डॉ. एसएन शर्मा, डॉ. आईसी गोयल, प्रो. मुकेश गुप्ता, प्रो. प्रवीन खेरडे, प्रो. सरिता दलाल, प्रो. अनू आहूजा, डॉ. बाल किशन शर्मा, डॉ. मुकेश पुनिया, प्रो. नरेंद्र कोशिक मौजूद रहे।