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अंधेरी सुनसान सड़कों से गुजरना हुआ मुश्किल

Sat, 21 Jun 2014 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
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शहरवासियों को रात के समय सड़कों पर डर के साए में आना-जाना पड़ रहा है, क्योंकि शहर की सड़कों, चौक-चौराहों और मुख्य मार्गों पर रात के अंधेरे को उजियाले मेें बदलने के लिए लगाई गई करीब पांच हजार स्ट्रीट लाइटों में से आधी तो खराब ही पड़ी हैं।
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ऐसे में अंधेरे का फायदा उठाकर शरारती और असामाजिक तत्व किस जगह पर वारदात कर दें, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।

नगर निगम ने शहरभर में खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने का ठेका दे रखा है। जिस ठेकेदार को इसका ठेका दे रखा था, उसने रिपेयर से हाथ खड़े कर दिए हैं।

ठेकेदार द्वारा रिपेयर से हाथ खींचे भी कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक लाइटों को ठीक करने का काम जिम्मा किसी नए ठेकेदार को नहीं दिया गया है। लाइट ठीक नहीं होने पर लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
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रात को छीना-झपटी, मारपीट, लूटपाट जैसी कई वारदात हो चुकी है।

प्रवासी श्रमिक रहमान, मोहम्मद अकील, जयप्रकाश और पप्पू ने बताया कि उनके साथियाें व जानने वालाें के साथ रात के अंधेरे के चलते लूटपाट की कई वारदात हो चुकी है।

प्रवासी होने के कारण उनकी सुनवाई भी नहीं पाती। पेट पालने के लिए जिस भी शिफ्ट में काम मिलता है, उसे करना जरूरी है।

शहर मेें हैं करीब पांच हजार स्ट्रीट लाइट
शहर में स्ट्रीट लाइटों की संख्या करीब पांच हजार है। इनमें से करीब दो हजार स्ट्रीट लाइट खराब हो चुकी हैं। क्षेत्र निवासी आए दिन अपने क्षेत्रोें में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक करवाने के लिए आ रहे हैं, लेकिन यहां पर उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं होता। लोगाें की शिकायत सुनकर विभाग के अधिकारी भी परेशान हो जाते हैं।

ठेकेदार ने नुकसान के चलते छोड़ा ठेका
जिस ठेकेदार ने स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने का जिम्मा लिया था, उसे नुकसान का भय सता रहा था। उसके लिए काम को पूरा कर पाना मुश्किल हो रहा था। इसी के चलते ठेकेदार ने बीच में ही काम छोड़ दिया।

सदन की बैठक मेें भी उठी थी मांग
हाल ही में सदन की बैठक में भी स्ट्रीट लाइटों की रिपेयर से संबंधित मांग उठी थी। पार्षदों की मांग को ध्यान मेें रखते जिला प्रशासन ने जल्दी ही उचित समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक समाधान के लिए कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है।

रोजाना आते-जाते हैं हजारों लोग
पानीपत औद्योगिक नगरी होने के कारण यहां पर रात के समय भी फैक्टरी व कंपनियोेें में काम चलता है। शहर में रातभर लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में रात के समय किस के साथ क्या घटना हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। घर से फैक्टरी या फैक्टरी से घर कुशलता से पहुंच जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है। रात को आने-जाने वालों में फैक्टरियों में काम करने वाले गरीब मजदूर ही होते हैं। रात की शिफ्ट में मजदूराें की संख्या 40 हजार से ऊपर हो सकती है। ये पैदल या साइकिल पर ही आते जाते हैं। ऐसे में किसी अंधेरी जगह पर शरारती तत्व आसानी से काम को अंजाम दे सकते हैं।

सभी स्ट्रीट लाइटों को चालू रखने की होती है जिम्मेदारी
स्ट्रीट लाइटों की रिपयेर का जिम्मा जिसे भी दिया जाता है, उसे शहर की सभी लाइटों को चालू हालत में रखने की जिम्मेदारी होती है। कोई भी लाइट खराब होने पर उसे जल्दी ठीक करना होता है। इसमें उसे चाहे कुछ भी सामान बदलना पड़े, सभी उसी की जिम्मेदारी होती है।
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