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मां-बेटी समेत चार वैरागन बहनों ने ग्रहण की दीक्षा

Thu, 02 Feb 2017 12:02 AM IST
amar ujala beuro panipat
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- फोटो : amar ujala
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गांधी जैन स्थानक के प्रांगण में चार वैरागन बहनों की जैन भगवती दीक्षा हर्ष उल्लास के साथ हुई। जिसके गवाह सभा में उपस्थित संत व साध्वीवृंद्व के अतिरिक्त पूरे उत्तर भारत से पधारे हजारों लोग भी बने।
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बुधवार प्रात: नौ बजे हुडा सेक्टर 11-12 से शोभायात्रा प्रारंभ होकर गांधी मंडी पहुंची। जिसमें सैकडों भाई व बहनों ने भाग लिया। इस दीक्षा महोत्सव में 17 संत व 32 साध्वियों ने भाग लिया। जैन मूर्ति पूजक समाज के आचार्य धर्मधुरंदर मुनि ने अपने तीन शिष्यों के साथ समारोह स्थल पर वैरागन बहनों को आशीर्वाद देने पहुंचे। इस कार्यक्रम में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश दिल्ली व चंडीगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत से श्रद्धालु पहुंचे। जिनका गांधी मंडी के जैन समाज के लोगों ने माला और पटके पहना कर स्वागत किया ।
धर्य मुनि व दीपेश मुनि ने सुंदर भजन प्रस्तुत किए। उपप्रवर्तक आनंद मुनि महाराज द्वारा लिखित पुस्तक पदचाप का विमोचन धर्मधुरंदर मुनि महाराज ने किया गया। कहा प्रभु महावीर के शासन में बहुत अदभुत बाते हैं। दीक्षा लिए बिना तीर्थकर भी अपना कल्याण नहीं कर सकते। भगवान के समवसरण में श्रावक व संतों को सुंदर उपदेश भगवान महावीर ने दिए थे। उन्होंने मुमुक्षु आत्माओं के शीघ्र आत्म कल्याण का आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर वैरागन कोमल जैन ने अपने तेजस्वी व ओजस्वी भाषण में कहा कि इस समय मेरी वे भावनाएं पूर्ण हो रही हैं। जिसके लिए मैं बहुत समय से लालायित थी। मैं आज संकट से शंकर बनाने वाले आचार्य भवन व गुरुणी महाराज से आशीर्वाद मांग रही हूं। उन्होंने अपना सांसारिक परिचय भी दिया।
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कहा संसार धोखा है। माया व कपट का जाल है । अत: मैं इसमें क्यों फंसू। संयम में आयु कभी बाधा नहीं बन सकती अत: मैं शुद्ध संयम पालने का संकल्प लेती हूं। संयम भावना को मजबूत करने के लिए उन्होंने सब साधु व साध्वियों का आभार प्रकट किया। वैरागन एकता जैन ने कहा कि उसकी भावनाएं व कामनाएं आज पूरी होने जा रही हैं। जिला जींद के बड़ोदी गांव की रहने वाली चहल गोत्र व जाट परिवार में जन्मी इस वैरागन की माता राजरानी भी इसके साथ ही इस संसार को त्याग कर संयम जीवन को अंगीकार कर रही हैं। इनकी बड़ी बहन भी साध्वी बनी हुई। भाई व बहन भी साधु बने हैं। पूरे में कुल छह सदस्य थे जो सभी साधु जीवन अंगीकर कर चुके हैं। कहा संयम आग के अंगारों से भी दुष्कर है। काटों भरे रास्तों पर चलने के समान है। मैंने साधु जीवन के पांच महाव्रत व 22 परिषहों को स्वीकार किया है ।
वर्तमान व भविष्य उज्जवल होने की कामना के साथ संयम मार्ग पर कदम बढ़ाया है। आज से मैं यह राजसी वेशभूषा त्यागकर केसरिया बाणा धारण करने वाली हूं। मेरी सांसारिक माता श्री राजरानी जैन को भी नमन करती हूं। जिन्होंने न केवल संयम मार्ग पर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, बल्कि स्वयं भी संयम मार्ग के रथ पर आरूढ हो गई । इस अवसर पर ध्वजारोहण भी किया गया। नवीन जैन ने नवकार दरबार का अनावरण किया। नरेश जैन बहादुरगढ़ वालों ने कैलाश दरबार का अनावरण किया तथा सरिता जैन ने शीतल दरबार का अनावरण किया। पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि प्रवृति को छोड़कर निवृति धारण करना ही संयम है। प्रत्येक दीक्षार्थी पांच महाव्रत धारण करता है। संयम धारण करने वाला ब्रहमचर्य जैसा दुष्कर व्रत धारण करता है ।
उन्होंने कहा कि आचार्य उमा स्वाती ने कहा है कि कर्मों का क्षय करने वाला ही मोक्ष का वरण करता है। जैन दर्शन में मोक्ष प्राप्ति का अधिकार पुरुष व स्त्री को समान रूप से दिया गया है। त्याग ही सुख व राजमार्ग है। कामनाओं का दूसरा नाम ही संसार है। दीपेश मुनि महाराज ने कहा कि पानीपत के विशाल संघ प्रति वर्ष दीक्षाएं करवाता रहता है। अब तक पानीपत में आज होने वाली चार दीक्षाओं सहित कुल 45 दीक्षाएं हो चुकी हैं। वैरागन एकता व राजरानी का अकेला ऐसा परिवार है जिसमें परिवार के सभी छह सदस्यों ने दीक्षा ग्रहण की हैं । यह परिवार साधुवाद का पात्र है। आचार्य सुभद्र मुनि महाराज ने कहा कि वैरागन बहनों के सांसारिक माता-पिता व धर्म के माता-पिता से आज्ञा लेने के बाद ही किसी वैरागी को दीक्षा का पाठ पढ़ाया जाता है। सभा में उपस्थित सभी वेरागनों के सांसारिक माता-पिता व धर्म के माता पिता ने हाथ खड़े कर दीक्षा की स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद दीक्षा संपन्न करवाने वाले पानीपत गांधी मंडी जैन समाज के प्रधान व कार्यकारिणी से स्वीकृति प्राप्त की। इसके उपरांत सभा में उपस्थित समस्त समाज से हाथ खड़े करवा कर अनुमोदना करने को कहा। इसके बाद आचार्य सुभद्र मुनि महाराज ने दीक्षा का मंगल पाठ पढ़ाया तथा मुनि की वेशभूषा पहन कर सभी चारों वैरागन बहने साध्वियां बन गई। सभी चारों नवदीक्षित साध्वियों ने संयम मार्ग पर दृढ़ता से चलने का अपना संकल्प दोहराया। वैरागन  राजरानी जैन को साध्वी राजश्री, एकता जैन को लक्षिता, कोमल जैन को साध्वी शियल और पूनम जैन को साध्वी आराधिका नाम दिया गया। उन्होंने चारों को अपनी गुरुणी के अतिरिक्त एक वर्ष तक मोन व्रत साधना का नियम कराया। उन्होंने एक वर्ष तक प्रतिदिन एक घंटे नवकार मंत्र का जाप व अधिक से अधिक स्वाध्याय करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बड़ी दीक्षा का पाठ आठ फरवरी को गांधी मंडी जैन स्थानक में पढ़ाया जाएगा।       
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