पानीपत। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) रिफाइनरी के आसपास के आठ गांवों के जल सुधार की दिशा में आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रशासन को 30 जून तक का वक्त दिया था, लेकिन अब तक प्रपोजल ही तैयार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर उसे आसपास के गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाने थे, लेकिन कोविड के चलते यह काम गति नहीं पकड़ सका। कुछ ही कैंप लगाए गए। ये हालात तब हैं जबकि एनजीटी पानीपत के पर्यावरण की स्थिति को लेकर चिंता जता चुका है।
पानीपत में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एनजीटी पानीपत के शुगर मिल को दो बार बंद करने के आदेश दे चुकी है और दो बार हर्जाना भी लगा चुकी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रशासन ने एनजीटी के निर्देशों का अनुपालन नहीं किया। पानीपत रिफाइनरी भी हर्जाने के 25 करोड़ रुपये जमा करवा चुकी है। रिफाइनरी ने एनजीटी में दायर अपनी अपील में पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई करने का विश्वास दिलाया था। जो स्वास्थ्य कैंप लगाए जाने थे, वे भी अधूरे रहे।
इसके अलावा इस साल 31 दिसंबर तक प्रशासन को रिफाइनरी के साथ मिलकर आसपास पौने तीन लाख पौधे लगाने हैं। इसके लिए आसन गांव ने 35 एकड़ भूमि भी दी है लेकिन इस पर भी अभी प्लानिंग ही चल रही है। अब एनजीटी प्रशासन के इस ढीले रवैए पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है। वहीं अब एसएचपीसीबी शुगर मिल से भी जल्द 4.13 करोड़ रुपये हर्जाना वसूलने की प्रक्रिया में जुट गया है। इस धनराशि से आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण के लिए बेहतर काम होना है।
रिफाइनरी के आसपास के क्षेत्र की जांच
संयुक्त टीम ने रिफाइनरी और इसके 10 किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र में भूजल की जांच कराई थी। यहां से 31 सैंपल भरे गए। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी साथ रहा। लैब से जांच रिपोर्ट चिंताजनक मिली। रिफाइनरी और इसके आसपास का पीएच 7.15 से 8.24 मिला। क्लोराइड 250 एमजी से नीचे मिला। खंडरा गांव के सरकारी स्कूल से लिए पानी के सैंपल में फ्लोराइड 0.36 एमजी प्रति लीटर रही। एनजीटी ने रिफाइनरी को प्रशासन के साथ मिलकर भू जल को बेहतर करने के लिए काम करने के निर्देश दिए थे।
रिफाइनरी ने केमिकल युक्त पानी और वायु प्रदूषण से खराब किया पर्यावरण
रिफाइनरी ने केमिकल युक्त पानी का सही ट्रीटमेंट न करने और वायु प्रदूषण से आसपास के गांवों की हवा खराब तो की ही, भूजल को भी खराब कर दिया। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ा।
जल सुधार : 30 जून तक का समय
रिफाइनरी के कारण मेहंदीपुर में 8.58, महमूदपुर में 8.61 और खोड़ा खेरी में 9.87 पीएच मिला। इसी तरह से ददलाना में फ्लोराइड 1.51 और कुताना में 1.61 एमजी प्रति लीटर मिला। आयरन की मात्रा भी ज्यादा मिली। बड़ौली में 2.239 और बाबरपुर में 1.209 एमजी प्रति लीटर आयरन मिला। 30 जून तक ट्यूबवेल बदलने के निर्देश दिए थे। अब जन स्वास्थ्य विभाग इस पर रिफाइनरी के साथ मिलकर प्लानिंग कर रहा है।
31 दिसंबर तक ये काम करने हैं
थिराना ड्रेन और रिफाइनरी के आसपास के साथ ही नजदीक के गांव में 47 तरह के 2 लाख 43 हजार 390 पौधे लगाए जाएंगे। जो 6 से 8 फीट लंबे होंगे। इन पौधों को बढ़ने में 10 साल लगेंगे। इसके लिए 31 दिसंबर 2021 तक समय तय किया है।
यह है मामला
सिठाना के सरपंच सतपाल ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। उन्होंने पानीपत रिफाइनरी पर जल प्रदूषण होने का आरोप लगाया था। उनका आरोप था कि इससे आसपास का भूजल दूषित हो गया है और लोग गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं। एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते 15 नवंबर 2018 को जांच कमेटी गठित की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर पानीपत रिफाइनरी पर 17.31 करोड़ का जुर्माना लगा दिया था। रिफाइनरी ने लंबी लड़ाई के बाद हर्जाना राशि जमा करा दी थी।
रिफाइनरी के आस पास पौने तीन लाख पौधे लगने है। एक गांव ने 35 एकड़ भूमि भी दी है। वन विभाग इसकी प्लानिंग कर रहा है। सभी मुद्दों पर काम चल रहा है। 4 करोड़ से अधिक लागत में कई गांवों में बड़े नलकूप बदले जाएंगे, वहां पाइपलाइन से स्वच्छ पानी दिया जाना है। शुगर मिल से भी 4.13 करोड़ रुपये हर्जाना वसूलने की प्रक्रिया चल रही है।
- कमलजीत सिंह, रीजनल ऑफिसर, एचएसपीसीबी, पानीपत।