केंद्र सरकार के बाद प्रदेश सरकार के बजट में भी कोई रियायत नहीं होने से आक्रोशित ज्वेलर्स ने हड़ताल के 21वें दिन शहर विधायक के आवास का घेराव कर भीम गोड़ा चौक पर करीब दस मिनट का जाम लगाया। ज्वेलर्स ने जुलूस के दौरान बच्चों को साथ लेकर चाय बेची। ज्वेलर्स मोतीलाल कूपर ने भाजपा मंडल महामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बिजलीकर्मियों ने भी बजट में कर्मचारियों का कोई पहलू नहीं रखने पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
ज्वेलर्स एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान मंगलवार को शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी के सेक्टर-12 स्थित आवास का घेराव कर सरकार विरोधी नारेबाजी की। ज्वेलर्स ने इससे पहले सनौली रोड पर भीम गोड़ा मंदिर के सामने करीब दस मिनट तक जाम लगाया। ज्वेलर्स हलवाई हट्टा जुलूस में चाय बेचते हुए शहरी विधायक के आवास तक पहुंचे।
इस दौरान कई ज्वेलर्स के बच्चों ने भी चाय बेची। सर्राफा एसोसिएशन के प्रधान राजेश सूरी, संजय वर्मा व शेरचंद कपूर ने कहा कि केंद्र सरकार ने बजट में ब्रांडेड ज्वेलरी पर एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगा दी। इसके विरोध में ज्वेलर्स 20 दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है, लेकिन भाजपा सरकार ने उनकी मांगों पर कुछ भी फैसला नहीं लिया है। ज्वेलर्स मोतीलाल कपूर ने मंडल महामंत्री के पद से शहरी विधायक के आवास पर इस्तीफा दे दिया। वे तहसील कैंप मंडल मंडल महामंत्री के पद पर थे और भाजपा के बीस सालों से जुड़े हुए थे।
एचएसईबी वर्कर्स यूनियन ने किया प्रदर्शन
एचएसईबी वर्कर्स यूनियन ने मॉडल टाउन सब डिविजन के सामने सरकार विरोधी रोष प्रदर्शन किया। यूनियन ने दो सब डिविजनों को निजी हाथों में देने और बजट में किसी तरह की सुध नहीं लेने पर विरोध जताया। जिसकी अध्यक्षता प्रधान कृष्ण कुमार व संचालन सुनील कुमार ने किया। सब अर्बन यूनिट प्रधान तेजबीर मान ने कहा कि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो कर्मचारियों को मजबूरीवश विरोध में खड़ा होना पड़ेगा। समालखा यूनिट प्रधान राज सिंह कटारिया ने कहा कि सरकार ने थ्री-पी को बढ़ावा देने की कोशिश की है। कर्मचारी सरकार की मंशा को पूरा नहीं होने देंगे। इस मौके पर प्रवीण, जगदीश, ब्रह्म, महावीर सहरावत, कृष्ण व अतर सिंह मौजूद रहे।
कम्युनिस्ट पार्टी ने बजट को बताया मकड़जाल
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रदेश सरकार के आम बजट को मकड़जाल बताया। माकपा के जिला सचिव कामरेड सुनील दत्त ने कहा कि बजट की गहराइयों में जाकर देखा जाए तो इसमें न तो रोजगार है और न ही इससे महंगाई कम हो सकती। प्रदेश के हर व्यक्ति को बजट से उम्मीद थी, लेकिन बजट आने के बाद सबकी उम्मीद धरी की धरी रह गई। कृषि और उद्योगों को बढ़ावा देने की तरफ भी कोई खास ध्यान नहीं है। किसानों के साथ मुआवजे के नाम पर मजाक किया जाता है। पानीपत का टैक्सटाइल की लगातार प्रभावित होता रहा है। सरकार के समाज कल्याण के कार्यों में भी बजट खर्च करना चाहिए।