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180 करोड़ की नई करेंसी आने के बाद भी नहीं सुधरे हालात

Fri, 30 Dec 2016 12:03 AM IST
amar ujala beuro panipat
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p - फोटो : amar ujala
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 प्रधानमंत्री के 50 दिन पूरे होने के बाद भी बैंकों में जिले के लोग कैश के लिए परेशान हैं। लोगों को आज घंटों कैश के लिए खड़ा होना पड़ रहा है। जिस कारण बाजारों में केवल 20 प्रतिशत ही काम चल रहा है। अब लोग बिना कैश के बाजारों का भी रूख नहीं कर पा रहे है।
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पानीपत जिले के लीड बैंक के मैनेजर ने बताया कि अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। चूंकि पानीपत जिले में अभी बाजारों में ग्राहक आने शुरू नहीं हुए है। इसके लिए 15 दिनों तक का और अधिक समय लग सकता है। गांवों में कैशलेस का कार्य चल रहा है। सबसे अधिक कैश गांवों की जनता ही उपयोग में लाती है। शहर के 30 प्रतिशत लोग तो पहले ही कैशलेस का उपयोग करते थे। अब इस दौरान जो नए खाते खोले जा रहे है। अधिकतर नेट बैंकिंग के ही खोले जा रहे है। जिससे कैशलेस की संख्या बढ़ रही है।

दो दिन बाद ही होने लगी कैश की किल्लत
पानीपत जिले में एसबीआई की मेन ब्रांच की चेस्ट में 180 करोड़ आने के बाद तो दो दिनों तक सभी बैंकों में काम सुचारु रूप से चल सका, दो दिन बाद ही कैश कम पड़ने लगा। इस बारे में एसबीआई बैंक के मुख्य प्रबंधक सुरेंद्र पाठक ने बताया कि जो शुक्रवार को बैंक में 180 करोड़ आया था उसमें से सिर्फ 40 करोड़ ही पानीपत के लिए दिया गया था। जिस कारण ही कैश की थोड़ी दिक्कतें आ रही है। एसबीआई के बैंकों में कैश लोगों को मिल रहा है।
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50 दिन बीतने के बाद भी लोग घंटों लाइन में खड़े
बैंक खुलने के कई घंटे पहले ही लोगों को लाइनों में लगना पड़ रहा है। पचास दिन बीत जाने के बाद भी लोग लाइनों में खड़े होने को मजबूर है। लाइनों में खड़े लोगों ने बताया कि बैंक अधिकारी तो बोल देते है कि लोग हर रोज लाइनों में लग जाते है। लेकिन बैंक अधिकारियों को गरीब लोगों की मजबूरी दिखाई नहीं पड़ती है। कुछ लोग ऐसे भी जिनके परिवार में से कोई लोग अस्पताल में दाखिल है। जहां पर हर रोज कैश की जरूरत पड़ती है। अस्पतालों में न ही चेक लेते और न ही वहां पर स्वैप मशीन है। जिस कारण ही लोगों को हर रोज आना पड़ रहा है।

बैंक अधिकारी जल्द ही समस्या समाधान का दे रहे भरोसा
बैंक अधिकारी आठ नवंबर से ही जल्द समस्या का समाधान होने का भरोसा उपभोक्ताओं को दिला रहे है। लेकिन पूरे 51 दिन ऐसे ही भरोसा देने में निकल गए। लोगों को कैश तो नहीं मिल सका, लेकिन हर बार एक भरोसा बैंक अधिकारियों से जरूर मिला है। जो भरोसा अभी तक दिया जा रहा है। कई बैंक अधिकारियों का कहना है कि सरकार व आरबीआई लोगों को कैशलेस करना चाहती है। इसलिए ही कैश कम दिया जा रहा है। लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि आज स्मार्टफोन तो हाथ में पकड़ा नहीं तो वे कहा से कैशलेस की ओर जा सकते है।

जिले में कैश आने के बाद भी कैश की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। यह समस्या 15 जनवरी के बाद ही ठीक हो सकेगी। अभी गांवों को कैशलेस करने के लिए अभियान चला रखा है। धीरे-धीरे जिले के सभी गांवों को कैशलेस कर दिया जाएगा।  
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राकेश वर्मा, एलडीएम, पानीपत।
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