प्रदेश में सरकार बनाने के ढाई साल बाद भी भाजपा शहरी और ग्रामीण खेमे में बटी दिखी। प्रदेश कार्यकारिणी के बाद जिला कार्यकारिणी की बैठक में यह खुलकर सामने आ गया। ग्रामीण कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनको रैली के समय ही याद किया जाता है। जिम्मेदारियां देने के समय उन्हें अनदेखा कर दिया जाता है। कई कार्यकर्ताओं का मुख्यमंत्री मनोहर लाल के जिले में दो या चार लोगों तक सीमित रहने का दर्द भी ओपन सेशन में सामने आ गया। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री के आने पर उनको मिलने तक नहीं दिया जाता। सीएम के सिक्योरिटी गार्ड ही नहीं पार्टी के कई नेता तक उन्हें पीछे धकेल देते हैं। डीसी रेट पर लगाए जाने वाले कर्मचारियों के वक्त कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होती। अधिकारी कार्यकर्ताओं को तो सुनने तक को तैयार नहीं होते। इन गिले-शिकवों के बीच बैठक के पहले सत्र में राजनीतिक प्रस्ताव पास किया गया।
भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्यकारिणी की बैठक इस बार जिला कार्यालय गीता कॉलोनी की बजाय मॉडल टाउन स्थित कमालिया भवन में हुई। इसकी अध्यक्षता जिला प्रधान प्रमोद विज ने और संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला प्रभारी कविता चौधरी ने किया। माडल टाउन मंडल प्रधान वीरेंद्र तनेजा ने अपने मंडल के सभी पदाधिकारियों का स्वागत किया। जिला अध्यक्ष प्रमोद विज ने हाल ही में पानीपत में हुई प्रदेश कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक के सफल आयोजन पर जिले के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। संजय भाटिया ने पार्टी के अगले तीन माह में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा रखी। सत्यवान शेरा ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया। उसका अनुमोदन पूर्व जिला प्रधान गजेंद्र सलूजा और वरिष्ठ नेता सुनील सोनी ने किया। राजनीतिक प्रस्ताव पर कई पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। प्रस्ताव में शामिल जिले को कैरोसिन फ्री बनाने, 24 घंटे बिजली, बिजली चोरी रोकने, नाना देशमुख का मंडल स्तर पर शताब्दी वर्ष मनाने, कैशलेस योजना, जेलों में गोशाला खोलने, युवाओं को रोजगार आदि विषयों पर विचार रखे गए।
बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि पार्टी में सभी कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान दिया जाना चाहिए। पात्र युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए। इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य धर्मपाल जागलान, जिला महामंत्री देवेंद्र दत्ता, किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष संजीव दहिया, युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष मेघराज गुप्ता, युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पार्षद लोकेश नागरू, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, ओबीसी मोर्चा के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष रघुनाथ तंवर कश्यप, आईटी सेल के जिला प्रमुख राहुल सिंगला, जिला उपाध्यक्ष अजेमर मलिक, डॉ. सुरेंद्र टूटेजा, गोविंद पहलवान, प्रवीन बॉबी, सुदर्शन पाराशर, राजकुमार पाहवा, सुनील परढाना, मंजीत डिकाडला, महाबीर भार्गव, महेश नारंग, सुनील कंसल, राजेश जागलान, जगदीश रमन, मंडल महामंत्री अजय कादियान, राम सिंह सैनी, रविंद्र भाटिया, नरेश मलिक धर्मबीर शेरा, विशाल गोस्वामी, पालेराम सरपंच, सोनू मिर्जापुर, राजन शर्मा, मीडिया प्रभारी दीपक सलूजा, पंकज शर्मा, प्रदीप उपाध्याय, मनीष कड़वाल, विनोद खर्ब, विजय सहगल, महक दीवान, पूनम रानी आदि मौजूद रहे।
कुछ इस तरह से रही जिला कार्यकारिणी की बैठक
जिला कार्यकारिणी की बैठक 12 बजे शुरू हुई। इस बैठक में शहरी कार्यकर्ता सबसे आगे, जबकि ग्रामीण कार्यकर्ता पीछे की कुर्सियों पर बैठे थे। जिलाध्यक्ष ने मंच संभालते ही सभी कार्यकर्ताओं का प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के सफल आयोजन में सहयोग देने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बैठक में मंडल के प्रधान स्तर के कार्यकर्ता ही शामिल हो सकते हैं, अन्य कार्यकर्ता नहीं। यह सुनते ही बैठक में हंगामा हो गया। नाराज 15-20 कार्यकर्ता बाहर निकल आए। उन्होंने रोष प्रकट करना शुरू कर दिया। जिला प्रभारी ने बाहर आए कार्यकर्ताओं को वापस बुलाया। इस दौरान करीब 10 मिनट तक बैठक की कार्रवाई बाधित रही।
‘ग्रामीण कार्यकर्ताओं की नहीं होती सुनवाई’
थर्मल मंडल कार्यकारिणी सदस्य भगवान दास नौहरा ने बताया कि ग्रामीण कार्यकर्ताओं की कोई सुनने वाला नहीं है। वे संघर्ष के समय पार्टी के साथ खड़े थे। उस समय के लोगों में से किसी के पास भी अहम पद नहीं है। किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष धर्मबीर शेरा ने कहा कि ग्रामीण कार्यकर्ताओं को तो रैली के वक्त याद किया जाता है। उस वक्त उनको जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन नेताओं से मिलने के दौरान शहर के कार्यकर्ता सबसे आगे होते हैं। उन्हें मिलने तक नहीं दिया जाता। ग्रामीण कार्यकर्ताओं को मान-सम्मान तक नहीं मिल पाता।
शहरी कार्यकर्ताओं ने सरकार का किया गुणगान
पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और शहरी कार्यकर्ताओं ने सरकार का गुणगान किया। प्रदेश सचिव सत्यवान शेरा ने चंडीगढ़, भिवानी और फरीदाबाद निगम चुनाव में जीत के बाद आगे के चुनाव में इस सिलसिले को बनाए रखने की बात कही। सुनील सोनी ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को खत्म कर रही है और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली में भी बदलाव आ रहा है। डॉ. सुरेंद्र टुटेजा ने कहा कि सीएम विंडो से लोगों को न्याय मिल रहा है। सरकार प्रशासन पर भी नकेल कस रही है। पार्षद दुष्यंत भट्ट ने पार्टी के राजनीतिक प्रस्ताव को पारित करने के तरीके की सराहना की।
जागलान ने किसानों की बात उठाई तो भाटिया ने टोका
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य धर्मपाल जागलान ने कहा कि राजनीतिज्ञ प्रस्ताव में कुछ चीजें छूट गई हैं। इनमें मुख्यत: प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना है। इस बाबत कुछ भी नहीं लिखा गया। बीमा कंपनी किसानों से बिना पूछे ही प्रीमियम काट रही है। सरकार को इसमें संशोधन करना चाहिए। डाहर गांव में शुगर मिल की आधारशिला रख दी गई, लेकिन यहां पर एक ईंट तक नहीं लगी है। इस पर खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन संजय भाटिया ने उनको टोक दिया और केवल राजनीतिक प्रस्ताव पर ही चर्चा करने के लिए कहा। धर्मपाल जागलान संजय भाटिया की बात सुनकर धन्यवाद बोलकर अपनी सीट पर बैठ गए। किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष संजीव दहिया ने अपनी बात अधिकारियों तक सीमित रखी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के लिए समय निश्चित करना चाहिए। वे किसानों के बारे में एक शब्द भी नहीं बोल पाए।
कविता चौधरी ने मंडल अध्यक्षों से ली रिपोर्ट
जिला प्रभारी कविता चौधरी ने सायंकालीन सत्र की शुरुआत में ही मंडल अध्यक्षों के कामों की रिपोर्ट ली। उन्होंने कई अध्यक्षों से आने वाले दिनों में कराए जाने वाले कार्यक्रमों के बारे में जानकारी मांगी तो अधिकतर चुप रहे गए। जिला प्रभारी उनके इस रुख पर नाराज हो गईं। उन्होंने कहा कि जिले के बाद मंडल कार्यकारिणी की बैठक होनी है। सभी मंडल अध्यक्ष बैठक की रिपोर्ट दें और सरकार की गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाएं।
ओपन सेशन में झलका दर्द
जिला कार्यकारिणी की बैठक दूसरे सत्र में ओपन सेशन रखा गया। इसमें कार्यकर्ताओं के मन की बात सुनी गई। एक कार्यकर्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल पानीपत आते हैं। वे शहर के दो या चार कार्यकर्ताओं तक सीमित रहते हैं और उन्हीं के घर जाते हैं। मुख्यमंत्री को गरीब कार्यकर्ताओं के घर भी आना चाहिए। इससे कार्यकर्ता का समाज में सम्मान होगा। एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा कि डीसी रेट में नौकरियां बड़े नेताओं और मंत्रियों के कहने पर ही लगाई जाती हैं। इसमें कार्यकर्ताओं की भी बात सुनी जाए। वे सरकारी नौकरियों में नहीं तो डीसी रेट की नौकरियों में तो अपने नजदीकियों की सिफारिश कर सकते हैं। इसके बाद किसी कार्यकर्ता ने कविता तो किसी ने शायरी से अपने मन का दर्द बैठक में रखा। एक कार्यकर्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री पानीपत में आते हैं। वे उनसे मिलने जाते हैं, लेकिन सुरक्षाकर्मी और कई बड़े नेता उनको पीछे धकेल देते हैं। वे भी पार्टी के कार्यकर्ता हैं और उनका भी मन अपने मुख्यमंत्री से मिलने का करता है। एक कार्यकर्ता ने कहा कि अधिकारी छोटे कार्यकर्ताओं को तवज्जों नहीं दे रहे। इससे उनके सामने समस्या गहराती जा रही है। वे बूथ और मंडल पर लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान तक नहीं करा सकते।
यह है भाजपा में विवाद का मुख्य कारण
भारतीय जनता पार्टी ने जिले में 13 मंडल बनाए हैं। इनमें चार मंडल शहर और नौ मंडल ग्रामीण क्षेत्र में हैं। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि जिला कार्यकारिणी में ग्रामीण कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दी गई। उनको मुख्य पदों से दूर ही रखा गया है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि पार्टी में ग्रामीण और शहरी में 60 और 40 का नहीं, बल्कि 80 और 20 का अनुपात है। महिला कार्यकारिणी में भी ग्रामीण महिलाओं को अपेक्षाकृत पद या जिम्मेदारी नहीं दी जा सकी है।