नोटबंदी हुए एक माह बीतने के बाद भी बैंकों के हालात ठीक होने की बजाय बिगड़ते जा रहे है। बैंकों के बाहर पहले दिन की तरह ही आज भी लाइन ऐसे ही लगती है। बैंक के आगे कई दिनों से लाईनों में लगने के बाद भी राशि ना मिलने पर बुधवार को उपभोक्ताओं के सब्र का बांध टूट गया और बैंक कर्मियों पर अपने चहेतों को राशि देने और भेदभाव करने के आरोप लगाते हुए एसबीआई बैंक की बापौली शाखा के बाहर रोष प्रदर्शन किया। सरकार से बैंक में हो रहे लेन-देन की जांच करने की मांग की।
जोगिंद्र निवासी अत्तौलापूर, महाबीर निवासी बापौली, सुभाष, राजपाल व कृष्ण और महिला सुनीता, प्रवेश रावल, पिंकी, रेखा व कमलेश का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से बैंक में कैश लेने के लिए लाइनों में लगते है मगर लाइनों में लगे कुछ ही लोगों को कैश मिल पाता है बाकि पीछे लाइनों में लगे लोगों को बगैर कैश मिले ही खाली हाथ वापस जाना पड़ता हैैै। बैंक कर्मी अपने चहेतों को दोपहर बाद बैंक में अंदर बुला कर बड़ी रकम दे रहे हैं। जिस कारण छोटे कैश लेने वालों को दिक्कत आ रही है। ऐसे बैंक कर्मियों की जांच होनी चाहिए। इस बारे में शाखा प्रबंधक कानिक सूद का कहना है कि पब्लिक का काम है आरोप लगाना, उन्हें लगाने दीजिए। हम अपना काम सही ढंग से कर रहे हैं।