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दहेज हत्या में कई ने गवाही बदली, जज ने मृत्यु पूर्व दिए बयान के आधार पर चार को सुनाई उम्रकैद की सजा

Tue, 07 Feb 2017 11:51 PM IST
panipat beuro
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरसी डिमरी की अदालत ने राजा खेड़ी गांव में विवाहिता की दहेज हत्या में सास व ससुर समेत चार दोषियों को उम्रकैद की भी सजा सुनाई है। दोषियों में दो महिलाएं व दो पुरुष शामिल हैं। मामले में कई गवाहों ने बयान बदल दिए थे लेकिन कोर्ट ने डाइंग डिक्लेरेशन (मौत से पूर्व दिए बयान) को आधार मानते हुए दोषियों की सजा सुनाई है।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार राजा खेड़ी निवासी मनीषा की शादी 2010 में थाना सदर के अंतर्गत आने वाले गांव गांजबड़ निवासी सुरेश के साथ हुई थी। दो अक्टूबर 2014 को मनीषा की जहरीले पदार्थ के सेवन से हालत बिगड़ गई। उसको शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया। अस्पताल में उपचाराधीन मनीषा ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही सास संतोष, ससुर धर्मबीर, जेठ सुरजीत व जेठानी सोनिया उसको दहेज के लिए परेशान करते थे। उसने आरोप लगाया कि दो अक्टूबर को उसका पति सुरेश अपनी ड्यूटी पर गया हुआ था। उसकी सास, ससुर, जेठ व जेठानी ने पीछे से उसकेे जबरन जहर दे दिया। मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने के कुछ समय बाद मनीषा की मौत हो गई थी। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर चारों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
लंबे समय तक चली कानूनी कार्रवाई के बाद चारों आरोपियों को दो फरवरी को जिला सत्र न्यायाधीश आरसी डिमरी की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने चारों को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट में मंगलवार को दोषियों की सजा पर बहस हुई। इस मामले में अदालत में कुल 20 गवाहों की गवाही हुई। इनमें से कुछ गवाहों ने अपनी गवाही बदल ली थी, लेकिन अदालत ने डाइंग डिक्लेरेशन को आधार मानते हुए चारों दोषियों को धारा 498 के तहत 18 माह की सजा, एक हजार रुपये जुर्माना व जुर्माना न देने पर 10 दिन अतिरिक्त कैद, धारा 352 के तहत तीन साल कैद, दो हजार रुपये जुर्माना व न देने पर 20 दिन अतिरिक्त कैद, धारा 328 के तहत 5 साल कैद, तीन हजार रुपये जुर्माना व न देने पर 30 दिन अतिरिक्त कैद, धारा 304बी के तहत सात-साल कैद, पांच हजार रुपये जुर्माना व न देने पर 50 दिन अतिरिक्त कैद और धारा 302 के तहत उम्रकैद व दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर दोषियों को छह-छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
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