पानीपत। फरवरी में कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के ट्रायल की तैयारी शुरू हो गई है। गत सात अक्तूबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऋषिकेश के एम्स से 35 ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन किया था तब उसी दिन पानीपत में विधायक प्रमोद विज ने इस प्लांट का उद्घाटन किया था लेकिन इसके बाद से अब तक विभिन्न कारणों के चलते यह प्लांट चालू नहीं किया जा सका।
दो बार ऑक्सीजन प्लांट में चोरी हो चुकी है। चोर प्लांट से वॉल व पाइप चोरी कर चुके हैं, इसलिए ऑक्सीजन लीकेज का खतरा उत्पन्न हो गया था। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग ने प्लांट की मरम्मत कराई। पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने भी प्लांट का निरीक्षण किया और इंजिनियर से इसकी डिटेल ली। पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने इसी सप्ताह प्लांट के ट्रायल के लिए एलएंडटी अधिकारियों से संपर्क किया है।
गौरतलब है कि अक्तूबर में उद्घाटन के वक्त प्लांट की जांच के लिए भी एलएंडटी कंपनी से इंजीनियर आए थे और उनकी जांच में ऑक्सीजन की गुणवत्ता 95 प्रतिशत शुद्ध मिली थी। विधायक प्रमोद विज ने भी एलएंडटी को जल्द ऑक्सीजन की सैंपलिंग करने के साथ प्लांट का ट्रायल करने के लिए कहा था लेकिन इसके बावजूद दो महीने से ज्यादा बीत चुके हैं और ऑक्सीजन प्लांट शुरू होने की बांट जोह रहा है।
इस समय पहली और दूसरी लहर के डेल्टा वैरिएंट से भी छह गुना तेजी से संक्रमित करने वाले ओमिक्रॉन का खतरा मंडरा रहा है। जनवरी के बाद ओमिक्रॉन वैरिएंट के तीसरी लहर में तब्दील होने की आशंका जताई जा रही है। पहली और दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों को बहुत परेशान होना पड़ा था और इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की मदद से सिविल अस्पताल में एक हजार लीटर क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण कराया।
अगस्त में इसका निर्माण कार्य पूरा हो गया लेकिन फिर ऑक्सीजन शुद्धता की जांच लटकी रही। किसी तरह प्लांट में बन रही ऑक्सीजन शुद्धता की जांच गुरुग्राम लैब में पूरी हुई तो ट्रायल लटक गया। अक्तूबर में उद्घाटन हो गया लेकिन इसके बाद से अब तक इसे शुरू नहीं किया जा सका है।
नहीं आ रहे एनएंडटी से इंजीनियर, तीन बार भेजा जा चुका लिखित रिमाइंडर
ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल एलएंडटी के इंजीनियरों की मौजूदगी में होना है, लेकिन वे आ ही नहीं रहे हैं। इसकी वजह से ट्रायल लटका है। बीते दो महीने से एलएंडटी के इंजीनियर ट्रायल के लिए महज एक दिन का वक्त नहीं दे पा रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग तीन बार लिखित रिमाइंडर भेज चुका है। इतना ही नहीं फोन पर कई बार मौखिक बात हो रही है।
ट्रायल रन के लिए ऑक्सीजन के 50 बड़े सिलिंडर रिफिल करा इंतजार जारी
ट्रायल रन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न आए, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने बैकअप के तौर पर सात क्यूबिक मीटर के 50 बड़े ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिल करा लिए है। प्लांट से निकलने वाली ऑक्सीजन का सेचुरेशन स्तर दो बार जांचा गया, पहले 93 एवं दूसरी बार में 96 मिला है। ऑक्सीजन गुणवत्ता की जांच हो चुकी है। प्लांट की लाइन को अस्पताल के बेड तक जा रही सेंट्रल लाइन से भी जोड़ा जा चुका है।
प्लांट से एक मिनट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन मिलेगी
अगर प्लांट शुरू हो जाता तो एक मिनट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होता। इसके जरिए 150 बेड पर 24 घंटे आपूर्ति की जा सकती है। प्लांट शुरू होने से सिविल अस्पताल प्रबंधन को हर महीने 50 हजार रुपये की बचत भी होगी।
प्लांट की मरम्मत कराई जा रही है। एक बार प्लांट को चलाकर देखा जा चुका है। प्लांट सही वर्किंग कर रहा है, एक बार एलएंडटी इंजिनियर की निगरानी में ट्रायल जरूरी है। अस्पताल में ऑक्सीजन की किल्लत नहीं होगी। उम्मीद है कि जल्द प्लांट रनिंग में होगा । - डॉ. संजीव ग्रोवर , पीएमओ सिविल अस्पताल