माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। साइबर ठगी के आरोपियों को सिम तस्करी के आरोप में फूल विक्रेता को अवैध रूप से हिरासत में रखने और टार्चर करने के मामले में अदालत ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत प्रकरण की सुनवाई करते हुए डीएसपी और एसपी की जांच रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया है।
अदालत से स्पष्ट कहा कि जांच रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है। उधर, अदालत के आदेश के बाद पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी खुद ही आया था सीसीटीवी कैमरे के सामने उससे पूछताछ की गई थी।
नूरवाला निवासी महिला ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आदित्य जैन की अदालत में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उनके पति दीपक को 24 से 28 अक्तूबर तक सीआईए-3 द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। साथ ही उनके साथ मारपीट की गई है। अदालत से इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए डीएसपी से जांच रिपोर्ट तलब की थी। जिसमें अदालत से सीआईए थाने की 23 से 27 अक्तूबर की सीसीटीवी फुटेज, जीडी नकल, दीपक की मोबाइल फोन की लोकेशन और हिरासत से जुड़े अन्य सभी दस्तावेजों को जांच में शामिल करने के लिए कहा था।
डीएसपी ने सीआईए-3 में तैनात एसआई सुभाष चंद, एएसआई वीरेंद्र सिंह व राकेश को क्लीनचिट देते हुए अदालत में रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। लेकिन, वादी पक्ष के अधिवक्ता ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। जिसके बाद अदालत से एसपी से रिपोर्ट मांगी तो एसपी ने भी डीएसपी की जांच रिपोर्ट को ही आगे बढ़ा दिया था।