पानीपत। एक हजार घरों वाले गांव आसन कलां में करीब चार हजार मतदाता हैं, जबकि आबादी करीब आठ हजार की है। इस गांव की पंचायत जिले में सबसे अमीर पंचायतों में शुमार है, जिसका अकेले पंचायती जमीन का राजस्व करीब तीन करोड़ रुपये सालाना है। इसके अलावा जो सरकारी ग्रांट हैं, वो अलग। इसके बावजूद आज तक गांव में सुविधाएं तो दूर समस्याएं तक हल नहीं हो पाई हैं। ऐसे में पंचायती चुनाव ग्रामीणों के लिए अवसर लेकर आया है, ताकि वे ऐसे प्रत्याशी का चुनाव कर सकें, जिससे न सिर्फ उनकी समस्याओं का समाधान हो, बल्कि पंचायत का समग्र विकास हो।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में करीब एक हजार एकड़ पंचायती जमीन है। इसमें से करीब 800 एकड़ हर साल पट्टे पर देने के लिए बोली होती है। इससे करीब तीन करोड़ का राजस्व पंचायत को मिलता है, जबकि करीब 200 एकड़ जमीन पर आज भी कब्जे हैं। ये 2013 से चल रहे हैं। इसके लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस चले। जीत भी मिली, लेकिन आज तक गांव की सरकार इन कब्जों को छुड़ा नहीं पाई है। इसके अलावा गांव में मूलभूत सुविधाओं को भी ग्रामीण तरस रहे हैं। गांव में पीने के पानी से लेकर, गंदे पानी की निकासी, स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं हैं। कुछ ऐसी भी सुविधाएं हैं जो सिर्फ कागजों में हैं। इसे लेकर ग्रामीणों में भ्रष्टाचार की बातें भी आम हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब जो उनकी समस्याओं को हल कर गांव को सुविधा देगा उसे ही चुनेंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव आसन कलां को शहरी विधायक प्रमोद विज ने भी गोद लिया था। गांव में दो करोड़ से विकास करने की घोषणा भी की, लेकिन एक पैसा भी नहीं दिया। विधायक की घोषणाओं और वायदों से आज तक न तो गांव का विकास हो पाया है और न किसी गरीब परिवार की मदद मिली।
गांव वालों ने ये बताई समस्याएं और ये रखी मांगें :
- गांव की पंचायती खेती बाड़ी की जमीन कब्जा मुक्त होनी चाहिए। इससे गांव की पंचायत को राजस्व मिलेगा और गांव का विकास होगा।
-दिनेश वाल्मीकि।
- गांव में बच्चों के लिए स्टेडियम नहीं है। लड़कियों का स्कूल मर्ज कर दिया गया है। लाइब्रेरी नहीं है। ये सभी सुविधा देने वालों को ही अपना कीमती वोट देंगे।
सेठपाल।
- गांव में स्ट्रीट लाइट नहीं है। सीसीटीवी नहीं है। निकासी नहीं है। पेयजल व्यवस्था नहीं है। गलियों और नालियों का भी बुरा हाल है। इनका समाधान और सुविधा देने वालें को ही नेता चुनेंगे।
-भूलन सिंह।
- गांव की पंचायती जमीन के पैसे का दुरुपयोग किया गया है। गांव के धरातल का विकास कुछ और कहता है जबकि कागजों में कहानी कुछ ओर है। अबकी बार ईमानदार प्रत्याशी को ही चुनेंगे।
- तेजपाल।
पढ़े लिखे और समझदार प्रत्याशी को ही वोट दिया जाएगा, जो गांव के विकास के बारे में सोचे। समस्याओं को हल करवाए और सुविधा दे। इसे लेकर मंथन किया जा रहा है।
- ब्रह्मपाल।
वर्जन:
मैने दो करोड़ रुपये से विकास कार्य कराने की घोषणा जरूर की थी, लेकिन पंचायत को गांव के विकास कार्यों की मांग अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से पहुंचानी चाहिए थी, जो मेरे पास अब तक नहीं आई हैं। अगर विकास कार्यों की मांग आती है तो बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
- प्रमोद विज, विधायक, शहरी विधानसभा