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Panipat News: एक चौथाई आबादी अस्थमा से पीड़ित

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पानीपत। जिले में दमा रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक चौथाई आबादी अस्थमा से पीड़ित है। संख्या को देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग इस पर अध्ययन करेगा। मेडिकल के पीजी के विद्यार्थियों से स्वास्थ्य विभाग यह अध्ययन कराएगा। यह विद्यार्थी दमा रोगियों की हिस्ट्री जांचेंगे। शहर की आबो हवा की जांच करेंगे। प्रदूषण मामलों के विशेषज्ञों से शहर की हवा की गुणवत्ता की जानकारी लेंगे।
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दमा रोगियों पर रिसर्च के बाद यह रिपोर्ट मुख्यालय में भेजी जाएंगी। फिर मुख्यालय की ओर से दमा के खिलाफ एक रणनीति तैयार कर इस पर अंकुश लगाने के प्रयास होंगे। पानीपत में हर माह 1500 से अधिक नए दमा रोगी मिलते हैं। जिला नागरिक अस्पताल में दमा रोगियों की प्रतिदिन की ओपीडी 30-35 से अधिक है। औसतन दो दमा रोगी इलाज के लिए इमरजेंसी में आते हैं। निजी अस्पतालों में यह ओपीडी 200 से अधिक है। अक्तूबर व नंबवर में यह ओपीडी दोगुना से अधिक हो जाती है।

जिले की एक चौथाई आबादी अस्थमा से पीड़ित है। इनमें बुजुर्गाें की संख्या अधिक है। धूम्रपान करने वाले लोग अस्थमा से अधिक पीड़ित हैं। औद्योगिक नगरी होने व यातायात दबाव अधिक होने के कारण वातावरण में रसायन युक्त धुंआ मिश्रित रहता है। कंबल, चादर, कारपेट निर्माण के चलते इनके रेशे भी वातावरण में तैरते हैं। जगह-जगह कंस्ट्रक्शन कंपनियों का निर्माण कार्य भी चलता रहता है। इसलिए लाखों लोग अस्थमा से ग्रस्त हो चुके हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास फेफड़ों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए स्पाईरोमैट्री मशीन नहीं है। इसके लिए डॉक्टरों को एक्स रे का ही सहारा लेना पड़ता है। सबसे अधिक दमा के रोगी फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक हैं। यह रुई, कंबल, डाइंग व धागा के मिलों में बिना मुंह ढके काम करते हैं। सांस के जरिए इनके शरीर में कपड़े का रुआ जाता है, जो दमा का कारण बनता है। फैक्ट्रियों में काम करने वाला हर पांचवां श्रमिक दमा रोगी है।
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अस्थमा से बचाव :


-मच्छर भगाने के लिए क्वायल नहीं जलाएं।
-घर में पालतू कुत्ता-बिल्ली के संपर्क में न रहे।
-जिस चीज को खाने से एलर्जी होती है उसे न खाएं।
-धूल, धुआं और धूम्रपान से परहेज करें।
-घरों में बिछे कारपेट सावधानी से साफ करें।




वर्जन-


जिला सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि ने बताया कि एलर्जी ज्यादातर बच्चों, किशोरों और महिलाओं को होती है। इसका इलाज अस्पताल में संभव है। अस्थमा जेनेटिक भी हो सकता है और धूम्रपान व प्रदूषित वातावरण से भी दमा के रोगी हो सकते हैं। हर दसवां बच्चा अस्थमा जैसे लक्षणों से प्रभावित है। बेहतर होगा कि बच्चों को ठंडी खाद्य सामग्री खाने को न दें। धूल, धुआं, पालतू पशुओं व जानवरों से बचाएं। बीडी-सिगरेट को त्यागें। अब दमा रोगियों पर मुख्यालय के निर्देशों पर अध्ययन भी कराया जाएगा।
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