पानीपत। सरकारी और निजी क्षेत्र के चिकित्सकों के सामने अपनी चिंता और मसले गंभीर हैं। सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक जहां वर्कलोड कम करने और कैडर समेत अन्य मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं निजी क्षेत्र के चिकित्सक सामाजिक सुरक्षा समेत नए कानूनों के आने के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। वे मानते हैं कि समाज में उनको भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन वे भगवान नहीं हैं। वे एक मरीज का बेहतर इलाज करते हैं। कई बार किसी मरीज के साथ अनहोनी होने पर पूरा ठीकरा चिकित्सक पर फोड़ दिया जाता है। पहले तोड़फोड़ होती थी अब तो सीधे हमले होने लगे हैं। इन सबको देखते हुए सामाजिक सुरक्षा की जरूरत महसूस होने लगी है।
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केंद्रों पर सरकारी गाड़ी की नहीं है व्यवस्था
सीएससी मतलौडा के एमओ डॉ. लाभ सिंह ने बताया कि ग्रामीण अंचल के केंद्रों पर सरकारी गाड़ी की व्यवस्था नहीं है। उनको गांवों व शहर में दौरे पर जाना होता है तो किसी प्रकार का अलाउंस नहीं मिलता है और न ही गाड़ी किराये पर ले जा सकते। उनको अपने स्तर पर इन सबकी व्यवस्था करनी पड़ती है। पिछले दिनों इसका प्रस्ताव पास किया गया था, लेकिन यह अब तक लागू नहीं किया जा सका है।
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मांगों को पूरी तरह नहीं किया लागू
सामुदायिक केंद्र बापौली में चिकित्सक डॉ. भावना अरोड़ा ने बताया कि चिकित्सक के सामने कई तरह की समस्या रहती हैं। उनको एक करोड़ का बांड भरना होता है। चिकित्सकों ने पिछले दिनों इसको कम करने की मांग को लेकर संघर्ष किया। यह 50 लाख रुपये किया गया है। इसको पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा एक चिकित्सक पर वर्क लोड अधिक है। उनको ओपीडी और इमरजेंसी में ड्यूटी देने के साथ कोर्ट केस में भी जाना पड़ता है।
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अलग कैडर की मांग नहीं हुई पूरी
सामुदायिक केंद्र बापौली में एमओ डॉ. सुदेश पाल ने बताया कि अब सीएमओ की सीधी भर्ती की जाने लगी है। वे पिछले दिनों से इसके विरोध में संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने उनकी मांगों को मानते हुए अलग से कैडर बनाने की बात कही थी, लेकिन यह अब तक लागू नहीं किया जा सका है। यह चिकित्सकों के भविष्य और उनकी पदोन्नति के लिए बड़ा विषय है।
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चिकित्सक महसूस कर रहे असुरक्षा
डाॅ. पूजा मेहंदीरत्ता ने बताया कि एक व्यक्ति तीन से आठ साल की पढ़ाई करने के बाद अच्छा चिकित्सक बन पाता है। उसको अपना अस्पताल शुरू करने के लिए करोड़ों रुपये लगाने पड़ते हैं। वह यह सब लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देने के लिए करता है। बावजूद इसके छोटी सी घटना पर चिकित्सक पर हमला कर दिया जाता है। इसके साथ कानूनों में भी किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाती। इन सबके चलते चिकित्सक असुरक्षा महसूस करने लगे हैं।
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चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए बने सख्त कानून
डॉ. हेमा रमन ने बताया कि चिकित्सक समाज की बेहतरी के लिए कार्य करता है। वह आपातकाल में रात के वक्त अपनी नींद छोड़कर मरीज की देखभाल के लिए आता है। वह उनको सामान्य करने में अपनी जी-जान लगा देता है। इन सबके बीच भी चिकित्सकों खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। चिकित्सकों पर कई बार हमले हो चुके हैं। यह सब उनकी चिंता को दर्शाता है। इसको लेकर सख्त कानून बनाने के साथ उनको लागू भी किया जाना चाहिए।
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सरकार समय पर जारी करे ग्रांट
निजी अस्पताल संचालक सरकार की योजनाओं के अनुरूप मरीजों का इलाज करते हैं। आयुष्मान योजना को सफल बनाने में निजी चिकित्सकों व अस्पतालों का विशेष योगदान है। अस्पतालों को कई-कई महीने में इनकी पेमेंट मिल पाती है, जबकि उनको हर महीने स्टाफ को वेतन देना होता है। इसके साथ अस्पताल को चलाने में अन्य कई तरह के खर्च होते हैं। सरकार को समय पर उनकी ग्रांट जारी करनी चाहिए।