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Panipat News: शरद पूर्णिमा पर आज चंद्रमा की रोशनी में रखी जाएगी खीर, मां लक्ष्मी की आराधना करेंगे श्रद्धालु

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वृद्धि, हर्षण और गजकेसरी योग सहित कई शुभ संयोगों में मनेगा पर्व, सुख-समृद्धि की कामना के साथ मंदिरों और घरों में होंगे भजन-कीर्तन
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा यानी कोजागरी पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। इस अवसर पर घरों और मंदिरों में मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना की जाती है। दूध और चावल से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा भी निभाई जाती है।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि इस बार शरद पूर्णिमा पर वृद्धि और हर्षण योग के साथ गजकेसरी योग बन रहा है। चंद्रमा और गुरु की केंद्र भाव में स्थिति से गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है। वहीं, तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की युति को लक्ष्मी-नारायण योग से जोड़कर देखा जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ संयोगों को सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मकता में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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समुद्र मंथन से जुड़ी है मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा की तिथि पर मां महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से भी है। मान्यता है कि इसी पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इस वजह से ब्रज क्षेत्र में पर्व का विशेष महत्व है।

चंद्रमा की रोशनी में रखी जाएगी खीर
पंडित प्रवीण शास्त्री ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर दूध और चावल से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक विश्वास है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृतमयी होती हैं। इसी मान्यता के चलते खीर को रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

पूर्णिमा तिथि 25 अक्तूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्तूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। रात्रि में पूर्णिमा तिथि होने के कारण 25 अक्तूबर की रात कोजागरी पूजा और चंद्रदेव की आराधना की जाएगी, जबकि 26 अक्तूबर को स्नान-दान का विधान रहेगा।
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सर्वार्थ सिद्धि योग 25 अक्तूबर की शाम 7:22 बजे से शुरू होकर 26 अक्तूबर की सुबह तक रहेगा। खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने के लिए रात 8:30 बजे से मध्यरात्रि तक का समय शुभ माना गया है।
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