- तहसील कार्यालय नंबर-17 में सुबह 9 बजे तक खाली थे कमरे, पटवारखाने पर सुबह 10 बजे तक दिखे ताले
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी के उपमंडल कार्यालय स्थित तहसील कार्यालय नंबर-17 का नजारा मंगलवार सुबह चौंकाने वाला था। सुबह 9 बजे कमरे खाली थे और सफाई चल रही थी। तहसीलदार से लेकर नायब तहसीलदार तक के कमरों में कुर्सियां खाली पड़ी दिखाई दीं, जबकि सुबह 9 बजे फरियादियों का आना शुरू हो गया था। इसके बाद 9:30 बजे एक कंप्यूटर ऑपरेटर आया तो इसके कुछ मिनट बाद ही दूसरे कर्मचारी भी आ गए। तहसीलदार और नायब तहसीलदार के न आने का कारण पूछा तो उन्होंने हाईकोर्ट में केस की सुनवाई के लिए जाना बताया, जबकि कर्मचारी जवाब नहीं दे सके। वहीं पटवारखाना सुबह 10 बजे तक बंद रहा।
तहसील के कमरा नंबर 17 में चार कंप्यूटर ऑपरेटर और एक आरसी की तैनाती है, लेकिन सुबह साढ़े नौ बजे तक यहां सन्नाटा पसरा था। कमरा नंबर 21, जहां तहसीलदार के रीडर बैठते हैं, वहां भी सन्नाटा ही मिला। काम की उम्मीद में सुबह से आए लोग बरामदे में खड़े होकर कर्मचारियों की राह देखते रहे। करीब आधे घंटे की देरी से एक ऑपरेटर पहुंचा और कंप्यूटर चालू किया। ऑपरेटर के आते ही लोगों ने उसे घेर लिया। लोगों का आरोप है कि सोमवार को भी वह दिनभर पोर्टल और सर्वर ठप होने के कारण धक्के खाते रहे और आज कर्मचारियों की लेटलतीफी ने उनकी परेशानी बढ़ा दी।
पटवारखाने में लटके ताले
तहसील की पहली मंजिल कमरा नंबर 115 से 117 पर स्थित पटवारखाने का हाल और भी बुरा रहा। यहां छह पटवारी और एक कानूनगो बैठते हैं, लेकिन सुबह 10 बजे तक यहां ताला लटका रहा। दोपहर 12 बजे जब कानूनगो रणसिंह से देरी का कारण पूछा गया, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और बिना बोले आगे बढ़ गए।
अफसरों की दलील कोर्ट में थी पेशी
तहसीलदार और नायब तहसीलदार के कमरे भी सुबह खाली मिले। पूछताछ में पता चला कि अधिकारी किसी केस के सिलसिले में हाईकोर्ट गए हुए थे। मामले को लेकर जब नायब तहसीलदार आशीष से बात की गई तो उन्होंने बताया कि तहसीलदार, पटवारी और डीआरओ के साथ हम हाईकोर्ट गए थे। तहसील के अन्य कर्मचारी समय पर ही आते हैं, यदि कोई देरी से आ रहा है तो उससे जवाब-तलबी की जाएगी। पटवारियों की ड्यूटी फील्ड में भी रहती है, इसलिए वे सीधे फील्ड में निकल जाते हैं।
आधे घंटे से कर रहे इंतजार
छावनी निवासी राजेश बंसल ने बताया कि उन्हें जमाबंदी लेनी थी। इसके लिए वह सुबह नौ बजे ही तहसील कार्यालय में पहुंच गए थे लेकिन उन्हें कोई कर्मचारी नहीं मिला और वह इंतजार करने लगे।
दो चक्कर लगा चुके
बोह निवासी महेंद्र पाल सैनी ने बताया कि सोमवार को वह ढाई घंटे परेशान होते रहे जमाबंदी लेने के लिए लेकिन सर्वर की दिक्कत के कारण वापस जाना पड़ा
चार घंटे होते रहे परेशान
जोगी मंडी निवासी पंडित सदानन शुक्ला ने बताया कि उन्हें जमाबंदी लेनी है यह उनका दूसरा चक्कर है, कल भी वह तहसील में चार घंटे तक परेशान होते रहे और वापस चले गए थे।
कई बार लगा चुके चक्कर
कोट कछुआ निवासी कृष्ण लाल ने बताया कि उन्हें फर्द निकलवानी थी पहले भी वह कई चक्कर लगा चुके सोमवार को वह दिन में साढे़ 12 बजे आए थे और शाम को साढे़ पांच बजे वापस गए लेकिन सर्वर नहीं चलने के कारण परेशान होकर वापस चले गए।
अंबाला छावनी तहसील में खाली पड़ी कुर्सियां। संवाद