माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। ऐ हो सखी तनी चुनरी लियाव, चुनरी लाके मां के ओढ़ाव..., पहिले पहिल छठी मैया..., कांच ही बांस के बहंगिया...और उग हो सूरज देव...समेत छठ मैया के गीतों पर औद्योगिक नगरी के घाट सोमवार रातभर और मंगलवार तड़के गूंज उठे। छठ मैया के गीतों का सिलसिला अर्घ्य देने तक चलता रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने की परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।
वहीं डीजे पर बजे गीतों पर नाचते गाते लोग घाट पर पहुंचे। घाटों पर भी गीतों पर जमकर थिरके। युवाओं के साथ बच्चे भी खूब झूमे।
बिहार और पूर्वांचल के लोगों ने सोमवार की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद घाटों पर रात के समय छठ मैया का जागरण किया गया। युवाओं व कलाकारों ने छठ मैया के गीत व भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं कई जगह माइक पर भजन को चलाया गया। मंगलवार तड़के करीब चार बजे फिर से घाटों पर छठ मैया के गीत गूंज उठे। बच्चाें से लेकर बड़े भी भजनों पर झूमे।
मन्नत पूरी होने पर दूध किया अर्पित
बच्चों व युवाओं ने छठ पर्व पर घाटों में उतरकर कच्चा दूध अर्पित किया। पूर्वांचल समाज के महासचिव कुमार चंदन ने बताया कि छठ माता से अपनी प्रार्थना करता है और इसके पूरा होने पर अगली छठ पर व्रतियों को कच्चा दूध अर्पित करते हैं। कुछ लोग इस दिन अपनी प्रार्थना छठ मैया को करते हैं।
महिलाएं बोलीं मैया सुख समृद्धि लाएंगी
विकास नगर की रूबी ने बताया कि वह बिहार के गया जिले से हैं और पिछले 30 साल से परिवार के साथ पानीपत रह रही हैं। यहां 15 साल से छठ महापर्व मना रहे हैं। छठ मैया के आशीर्वाद से परिवार में सुख समृद्धि बनी हुई है।
गोपाल कॉलोनी की संगीता यादव ने बताया कि वह बिहार के औरंगाबाद से है। पिछले 21 साल से गोपाल कॉलोनी में रह रही है। वह पांच साल से छठ व्रत रख रही हैं। वे छठ के चार दिवसीय महोत्सव के दौरान भोजन बनाते समय स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखते हैं। उन्होंने शनिवार को नहाय खाय किया गया और रविवार को खरना के बाद व्रत शुरू किया।
टीडीआई सिटी की पूजा झा ने बताया कि वे बिहार के झंझारपुर की रहने वाली हैं। उनकी सास बिहार में व्रत रखती हैं। वह यहां नियमों का पालन करती हैं। उन्होंने मंगलवार को सूर्य अर्घ्य देकर प्रसाद लेकर व्रत का पारण किया।