माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पुलिस ने बदमाशों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस अब डिजिटल डेटा तैयार कर रही है। पानीपत में 1072 सक्रिय अपराधियों की जांच कर उनका फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके बाद एक क्लिक पर ही बदमाशों की पूरी कुंडली खुलकर सामने आ जाएगी। वारदात के समय सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों के कैद होने पर उनके चेहरे के आधार पर ट्रैक करना आसान हो जाएगा। सभी थानों की पुलिस को उनके क्षेत्र में रह रहे बदमाशों की निगरानी करने व एफआरएस रिकॉर्ड अपलोड करने का लक्ष्य दिया गया है।
हरियाणा पुलिस अब बदमाशों की पहचान और निगरानी को लेकर पुलिस अब पारंपरिक रिकॉर्ड के साथ तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है। जिसमें एफआरएस डेटा भी अहम है। पानीपत जिले के सभी 14 थानों में 1072 अपराधियों को चिह्नित किया गया है। समालखा थाना क्षेत्र में सबसे अधिक 196 सक्रिय अपराधी हैं। वहीं, सेक्टर-29 में 112, मतलौडा क्षेत्र में 107 सक्रिय अपराधी हैं। इसराना में 99, पुराना औद्योगिक थाना क्षेत्र में 92, सनौली और किला में 84-84 सक्रिय अपराधी हैं। वहीं शहर थाने में सबसे कम आठ अपराधी हैं। इन सभी अपराधियों की निगरानी के लिए एक अगस्त को अभियान शुरू किया गया है। पुलिस द्वारा बदमाशों के ठिकानों पर पहुंचकर उनकी तस्दीक की जा रही है। साथ ही एफआरएस रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है।
अभियान में पुलिस अभी तक 1072 में से 577 बदमाशों को ट्रैक कर चुकी है। इनमें से 442 अपने-अपने घर पर मौजूद मिले, वही, 115 जेल में हैं, सात की मौत हो चुकी है, 13 अपराधियों घर पर नहीं मिले। अभी 495 बदमाशों की निगरानी की जानी है। पुलिस द्वारा 543 अपराधियों का एफआरएस डेटा भी अपलोड किया जा चुका है। बाकी अन्य अपराधियों के एफआरएस डेटा को अपलोड करने की प्रक्रिया चल रही है। एफआरएस में बदमाशों की फोटो, उनका आपराधिक इतिहास भी दर्ज किया जा रहा है।
वारदात के बाद सीसीटीवी से मिल सकता है सुराग
एफआरएस का सबसे अहम इस्तेमाल सीसीटीवी फुटेज की जांच में हो सकता है। किसी वारदात के बाद पुलिस को यदि संदिग्ध का चेहरा साफ दिखाई देता है तो उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड से उसका मिलान जांच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। इससे पुलिस को संदिग्ध की पहचान की दिशा में सुराग मिल सकता है।
-बार-बार अपराध करने वालों पर नजर
अपराधियों का एफआरएस रिकॉर्ड तैयार होने से उनकी पहचान संबंधी जानकारी एक जगह उपलब्ध रहेगी। किसी नए मामले में ऐसे व्यक्ति का नाम या चेहरा सामने आने पर पुलिस पुराने मामलों से उसका संबंध जांच सकेगी। इससे आपराधिक गतिविधियों में दोबारा शामिल होने वाले लोगों की निगरानी मजबूत होगी।
फैक्ट फाइल
थाने का नाम कुल अपराधी - निगरानी हुई - एफआरएस अपलोड हुआ
बापौली -53 35 -35
चांदनी बाग -69 21 -15
शहर -8 6 -5
इसराना -99 75 -72
मॉडल टाउन -37 36 -27
मतलौडा -107 62 -56
पुराना औद्योगिक -92 18 -18
किला -84 51 -51
सदर -11 11 -11
समालखा -196 82 -82
सनौली -84 43 -43
सेक्टर-13-17 -39 27 -26
सेक्टर-29 -112 76 -69
तहसील कैंप -81 34 -33
वर्जन
बदमाशों का एफआरएस रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे अपराधियों की निगरानी और वारदात के समय उनके बारे में जानकारी लेने में आसानी होगी। -सुरेश सैनी, डीएसपी।