कोरोना महामारी अब रिश्तों पर भी भारी पड़ रही है। अब अपने भी कोरोना संक्रमितों से मुंह मोड़ रहे हैं। शुक्रवार को जन सेवा दल ने तीन शवों का अंतिम संस्कार किया है। इनमें एक वृद्ध और एक बुजुर्ग है, जो कोरोना से जंग हार गए। इनका अंतिम संस्कार देखने के लिए जन सेवा दल के सदस्य परिवार के लोगों को कॉल करते रहे, लेकिन परिवार के लोगों ने मृतकों को पहचानने से ही इंकार कर दिया। जन सेवा दल ने इन शवों का लावारिस की श्रेणी अंतिम संस्कार किया। वहीं तीसरी मौत एक 21 साल की विवाहिता की हुई, उसने एक दिन पहले ही खानपुर मेडिकल कॉलेज में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। वह भी कोरोना से जंग हार गई।
70 साल की सोमा देवी को परिवार के लोगों ने सिविल अस्पताल में दाखिल कराया था। जैसे ही वह कोरोना संक्रमित मिली, परिवार के लोग उन्हें वहीं छोड़कर चले गए। शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। परिजन अस्पताल में भी गलत मोबाइल नंबर देकर गए थे। सोमा की मौत के बाद जन सेवा दल के सदस्यों ने लगातार फोन किया, लेकिन फोन नहीं मिला। परिवार के लोगों ने घर का एड्रेस भी यूपी लिखा हुआ था।
नरेश का भी अंतिम संस्कार नहीं देखने आए परिजन
तहसील कैंप के नरेश की भी शुक्रवार को कोरोना से मौत हो गई। जो अस्पताल में फोन नंबर लिखवाया गया था। उस पर जब अस्पताल के स्टाफ और जन सेवा दल के सदस्यों ने कॉल किया तो सामने वाले ने कहा कि ये गलत नंबर है। काफी तलाश करने के बाद भी मृतक नरेश के परिजन नहीं मिले।
सलमा छोड़ गई दो जुड़वा बच्चे
21 वर्षीय सलमा को पांच दिन पहले खानपुर मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया था। वह कोरोना संक्रमित थी। उसने दो दिन पहले दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। शुक्रवार को वो कोरोना से जंग हार गई। जन सेवा दल ने महराणा गांव के कब्रिस्तान में शव को दफनाया।