अब अधिकारियों को पाइप लाइन और मैटेरियल की जांच के लिए दूसरे प्रदेश नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए सरकार ने उन्हीं प्रदेशों की एजेंसी नियुक्त की है, जहां से माल आना है। थर्ड पाटी के तौर पर नियुक्त इन एजेंसियों से जांच के बाद ही हरियाणा में माल आएगा। ये एजेंसियां अमरूत प्रोजेक्ट के मैटेरियल की जांच कर निगम अधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर अप्रूवल लेंगी। अप्रूवल मिलने के बाद माल डिसपैच किया जाएगा। इस तरह अधिकारियों को कोरोना काल में सफर नहीं करना पड़ेगा और गुणवत्ता से भी समझौता नहीं होगा। बता दें कि प्रदेश में चल रहे अमरूत प्रोजेक्ट के तहत पानीपत में सीवर लाइन बिछाई जानी है।
30 सितंबर तक बढ़ाई समयावधि
अमरूत योजना के अंतर्गत लगने वाले पाइप लाइन ओर मैटेरियल कोलकाता और गुजरात से आता है। अभी तक यहां से तीन अधिकारियों की एक टीम वहां जाकर माल की जांच करती थी। सरकार ने कोलकाता और गुजरात की एजेंसियों को जांच के लिए चुना है। जांच के एक माह बाद माल को डिसपैच किया जाता है, पहले यह काम 30 जून तक पूरा होना था, लेकिन अब इसकी अवधि 30 सितंबर तक बढ़ा दी गई है।
31 दिसंबर 2011 तक पूरा होना है काम
अमरूत योजना के अंतर्गत शहर के आठ वार्डों में 52 कॉलोनियों में 134 करोड़ रुपये में पाइप लाइन बिछानी है। सीवरेज के लिए 211 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछानी है, जिस पर 98.5 करोड़ रुपये का खर्च होगा। अभी तक इसमें से 75 किलोमीटर लंबी लाइन को बिछाया जा चुका है। वहीं पानी की पाइप लाइन के लिए 104 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछानी थी, इसमें से अभी तक 25 से 30 किलोमीटर लंबी लाइन को बिछाया जा चुका है। वहीं अमरूत योजना के अधिकारियों का कहना है कि काम को शुरू हुए एक साल हो चुका है। उनके पास 31 दिसंबर 2021 तक का समय है। इसके अंतर्गत वे काम को निपटा लेंगे।
कोरोना महामारी के कारण सरकार ने ये फैसला लिया है, ताकि यहां के अधिकारियों को दूसरे प्रदेशों में जाने की जरूरत न पड़े। अब अमरूत प्रोजेक्ट में लगने वाले पाइपों की जांच वहीं पर होगी।
-महिपाल सिंह, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, नगर निगम