पानीपत में अब शहरवासी भी ताजी हरी सब्जियां और फलाें का स्वाद पा सकेेंगे। सब्जी उत्पादक किसान सुबह और शाम के समय सीधे खेतों से सब्जियां लेकर ग्राहकों को बेच सकेंगे। इस काम को सफल बनाने में बागबानी विभाग किसानों को अपना भरपूर सहयोग देगा।
विभाग ने अनुसूचित जाति से सबंधित किसानों को वेजिटेबल वेंडिंग कार्ड देने की योजना बनाई है। विभाग का दावा है कि गाड़ीनुमा वाहन पर तैयार किया गया वेजिटेबल वेडिंग कार्ड किसानों के लिए खेतों से सीधे ग्राहकों तक सब्जी पहुंचाने में कारगर साबित होगा। बिचौलियों की भूमिका खत्म होने पर किसान और ग्राहकाें को भी फायदा होगा।
भागदौड़ की इस जिंदगी में मुख्य रूप से ज्यादातर शहरवासी ताजी सब्जियाें का स्वाद ही भूलते जा रहे हैं। लोेगों को पास इतना समय नहीं रहा कि वे खुद खेतों या बागों में पहुंचकर ताजे फल या सब्जियां खरीदकर ला सकें। इसके चलते वे खुद और आने वाली युवा पीढ़ी ताजा चीजाें का जायके से वंचित हो रहे हैं।
बागबानी विभाग ने इस बात को ध्यान में रखते हुए किसानों को गाड़ीनुमा वेजिटेबल वेडिंग कार्ड उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। जिला में 20 किसानों को यह वाहन दिया जाएगा।
बागबानी विभाग अनुसूचित जाति के किसानों को वेजिटेबल वेंडिंग कार्ड खरीदने पर एक लाख 12 हजार रुपये का अनुदान के रूप मेें देगा। किसान को एक लाख 23 हजार रुपये खुद वहन करने पड़ेंगे। वेजिटेबल वेंडिंग कार्ड को टाटा-एस पर स्थापित किया है। यह गाड़ी डीजल से चलने वाली है। गाड़ी के लिए आरसी और इश्योरेंस खुद किसान को बनवाना होगा।
गाड़ीनुमा वाहन पर तैयार किया वेजिटेबल वेडिंग कार्ड एक साथ 10 क्विंटल तक लोड उठा सकता है। किसान खेतोें मेें खुद ही इसमें सब्जी लोड करके शहर में कहीं पर भी चौक चौराहों पर खड़े होकर बेच सकेंगे।
किसानों की माने तो वे मेहनत से खेतों में सब्जियां पैदा करते हैं। मगर बिचौलियाें की मार्फत सब्जी बेचने से उन्हें पूरा मुनाफा नहीं मिला पाता। मंडियों में बैठे दलाल किसान से सस्ती सब्जी खरीदकर कर चंद मिनटों में ही आगे मंहगे भाव पर बेच देते हैं। सब्जी की सीधी खरीद फरोख्त से जहां एक तरफ ग्राहकाें को सस्ती और ताजी सब्जियां प्राप्त हो सकेगी, वहीं किसानों को भी लाभकारी मूल्य मिल सकेंगे।
विभाग ने अनुसूचित जाति के किसानों के किसानों वेजिटेबल वेंडिंग कार्ड देने की योजना बनाई है। गाड़ीनुमा वाहन पर सेट किया गया है। किसानों को इसके लिए 1.12 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
डॉ. बिल्लू यादव, जिला उद्यान अधिकारी