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Panipat News: पूर्व सैनिकों के प्लॉटों पर 9.23 लाख का नॉन-कंस्ट्रक्शन चार्ज

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अजीत कुंडू। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) पूर्व सैनिक संगठन को सरकार की तरफ से सेक्टर-6 में आवंटित किए गए दो प्लॉटों पर 9.23 लाख रुपये का नॉन-कंस्ट्रक्शन चार्ज (गैर-निर्माण शुल्क) लगा दिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि वर्ष 2007 और 2009 में आवंटित इन प्लॉटों की प्रशासनिक अधिकारियों ने साल 2023 तक कोई सुध नहीं ली। पूर्व सैनिकों का कहना है कि वे कैंटीन, जिला सैनिक बोर्ड और ईसीएचएस की जगह मिलने के बाद भी निर्माण कार्य नहीं कर पा रहे हैं। प्राधिकरण ने उन पर यह नाजायज वित्तीय बोझ डाल दिया है।
पूर्व सैनिक संगठन ने कैंटीन, जिला सैनिक बोर्ड और ईसीएचएस एक ही जगह बनाने की मांग रखी थी। सरकार ने संगठन की मांग को देखते हुए 2007 और 2009 में दो प्लॉट आवंटित किए गए। प्लॉट नंबर-एक जिला सैनिक बोर्ड और पांच नंबर ईसीएचएस बनाने के लिए दिया था। पूर्व सैनिकों ने प्लॉट लेने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने का कई बार प्रयास किया, लेकिन कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। संगठन ने 2023 में फिर सक्रियता दिखाई तो एचएसवीपी ने 9.23 लाख रुपये का नॉन-कंस्ट्रक्शन चार्ज लगा दिया। वे अब इसे खत्म कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
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क्या कहते हैं पूर्व सैनिक:
कोट्स फोटो
पूर्व सैनिक संगठन के जिला उपाध्यक्ष अजीत कुंडू ने बताया कि सरकार की तरफ से पूर्व सैनिकों की सुविधा के लिए ये प्लॉट आवंटित किए गए थे। हमने नियमानुसार सभी जरूरी जगहों का भुगतान समय पर कर दिया था। सालों तक प्रशासनिक स्तर पर फाइलें दबी रहीं और अधिकारियों ने इस पर कोई सुध नहीं ली। अब अपनी गलती छुपाने के लिए एचएसवीपी पूर्व सैनिकों पर लाखों रुपये का जुर्माना थोप रहा है। यह सरासर गलत है।

कोट्स फोटो
सूबेदार मेजर ओमप्रकाश ने बताया कि हम देश की सेवा करके आए हैं और यहां अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जब जिला सैनिक बोर्ड और कैंटीन जैसी जनसुविधाओं के लिए जगह दी गई थी, तो उसमें देरी के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं, न कि पूर्व सैनिक। इस गैर-वाजिब चार्ज को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

कोट्स फोटो
सतबीर सिंह सहरावत ने बताया कि एचएसवीपी के अधिकारियों की ढुलमुल कार्यप्रणाली का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। 2007 से लेकर 2023 तक अधिकारी सोते रहे और अब अचानक 9.23 लाख रुपये का नोटिस भेज दिया गया। यदि प्रशासन का यही रवैया रहा, तो पूर्व सैनिक संगठन को इसके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ेगा।

कोट्स फोटो
सुभाष ने बताया कि यह पूर्व सैनिकों का अपमान है। एक तरफ सरकार कल्याणकारी योजनाएं चलाने की बात करती है, दूसरी तरफ एचएसवीपी जैसे विभाग कागजी कमियों और अपनी लेती-देती के कारण हमें परेशान कर रहे हैं। हम इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों तक जाएंगे।
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वर्जन :
एचएसवीपी ने नियमानुसार ही प्लॉट आवंटित किए थे। नियमानुसार संबंधित संगठन या लोगों को तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना था। निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य न करने के कारण ही नियमानुसार नॉन-कंस्ट्रक्शन चार्ज लगाया गया है। इसमें विभाग की तरफ से कोई अनियमितता नहीं है।
प्रतीक हुड्डा, ईओ, एचएसवीपी।

अजीत कुंडू। संवाद

अजीत कुंडू। संवाद

अजीत कुंडू। संवाद

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