मतलौडा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में डिलीवरी हट पर करीब दो माह से रात को किसी भी कर्मचारी की ड्यूटी नहीं लगने के कारण गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए निजी अस्पतालाें की शरण लेनी पड़ रही है।
मतलौडा पीएचसी में अक्तूबर में मात्र पांच और नवंबर में मात्र सात डिलीवरी हो पाई हैं। जबकि इससे पूर्व उक्त पीएचसी में हर माह औसतन 25 से 30 डिलीवरी होती थी।
पीएचसी के आंकडे़ बताते हैं कि तत्कालीन मेडिकल ऑफिसर डा. राजीव मान के कार्यकाल के दौरान पीएचसी में हर माह 25 से 30 डिलीवरियां होती थीं। उस दौरान दिन रात डिलीवरी हट पर एक एएनएम की ड्यूटी रहती थी। डिलीवरी हट में रात को भी कर्मचारियों और एंबुलेंस की सुविधा होने से 13 गांवों को फायदा मिलता था।
लेकिन अब दो माह से डिलीवरी हट रात को सुनसान रहता है। जांच में पाया गया कि डीसी रेट पर लगी एएनएम लंबी छुट्टियां लेकर चली जाती हैं तो कोई ड्यूटी करने से इंकार कर देता है। ऐसे में डाक्टर भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करके अनदेखा कर देते हैं।
इसके पीछे कारण यह है कि तत्कालीन डाक्टर ने पीएचसी की ड्यूटी न करने वाली एएनएम के खिलाफ लिखकर सीएमओ पानीपत के पास आगामी कार्रवाई के लिए भेजा था। लेकिन सीएमओ कार्यालय ने एएनएम पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जिससे शिकायतकर्ता डाक्टर की काफी किरकिरी हुई। अब इसी वजह से कोई डाक्टर न तो किसी एएनएम को ड्यूटी लगाने की बात करता है और न ही इनकी शिकायत सीएमओ कार्यालय को भेजता है। वहीं, हट में डिलीवरी के लिए लोग रात को आते हैं, लेकिन यहां स्टाफ न मिलने से लौट जाते हैं।
अधिकतर लोगों को अब पता चल चुका है कि पीएचसी में डिलीवरी हट पर रात को कोई कर्मचारी नहीं होता है। इसलिए भी लोग पीएचसी में आना बंद हो गए। मजबूरन लोगों को अब निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है।