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डीआर नागपाल बने आईबी सोसाइटी के प्रधान

Sun, 22 Dec 2013 12:39 AM IST
पानीपत
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पानीपत शहर की प्रमुख शिक्षण संस्थाओं में से एक आईबी एजुकेशन सोसाइटी के प्रधान पद का ताज देव रत्न नागपाल के सिर सजा, जबकि सचिव की जिम्मेदारी परमबीर धींगड़ा को दी गई है।
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चुनाव से कुछ देर पहले दूसरे पक्ष के साथ सहमति बनने पर एक पक्ष के उम्मीदवारों को समर्थन दिया गया और सभी 18 सदस्यों ने मतदान किया। आईबी एजुकेशन सोसाइटी शहर की प्रमुख शिक्षण संस्थाओं में से है। इसका त्रिवार्षिक चुनाव शनिवार को आईबी (एल) सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुआ।

जिसके आरओ तहसीलदार पानीपत सुरेश कुमार रहे। सोसाइटी के दोनों पक्षों में सदस्यों को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद शनिवार को चुनाव से कुछ देर पहले सुलझ गया।
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दोनों पक्षों में चुनाव को लेकर सहमति बनी और एक ही पक्ष को सभी ने मतदान करने का फैसला लिया। चुनाव में एक तरफ मुकाबला रहा और देव रत्न नागपाल को प्रधान पद की जिम्मेदारी मिली।

चुनावों पर थी पूरे शहर की नजरें
आईबी एजुकेशन सोसाइटी ने पानीपत में अपनी शाखा की वर्ष 1952 में स्थापना की थी। इस दौरान बाद शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देने की तरफ तो ध्यान दिया गया, लेकिन सदस्यों को बढ़ाने के बारे में कुछ नहीं किया गया। सोसाइटी सदस्यों के अनुसार, आजादी के बाद लैय्या बिरादरी के 55 सौ लोग पानीपत आए थे और कुछ सालों बाद यहां पर शिक्षण संस्थान शुरू करने का फैसला लिया।

उस समय सोसाइटी के 15 सदस्य थे। शनिवार को हुए मतदान में सभा के पंजीकृत सदस्य 18 हैं। चुनाव में बेशक इन 18 सदस्यों ने मतदान किया, लेकिन बिरादरी से संबंध रखने वाले करीब 25 हजार लोगों की नजर चुनाव पर थी। वहीं, अब आईबी एजुकेशन सोसाइटी अपना कार्यभार संभालेगी और फिर तीनों संस्थाओं के पदाधिकारियों के चुनाव कराएगी। इसमें सारी जिम्मेदारी सोसाइटी की ही होगी।

सोसाइटी के चुने गए पदाधिकारी इसको लेकर बैठक करेंगे और सबकी सहमति से पदाधिकारियों की नियुक्ति करेंगे।

ये है मामला
आईबी एजुकेशन सोसाइटी का चुनाव त्रिवार्षिक होता है। आठ जनवरी 2010 को इसका चुनाव हुआ था और वर्ष 2013 में इसकी समय सीमा पूरी हो चुकी है।

इसी बीच सोसाइटी में एक सदस्य बढ़ाने पर विरोध हो गया। सोसाइटी के सदस्य इसको लेकर दो पक्षों में बंट गए और एक पक्ष अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट में चला गया। प्रबंधक समिति की कार्य समय सीमा खत्म होने के बाद कालेज और स्कूल स्टाफ के वेतन व अन्य खर्चों की चिंता सताने लगी।

जिसको देखते हुए यहां पर एडीसी आरएस वर्मा को प्रशासक बनाया गया था।
 
ये थे चुनाव मैदान में
प्रधान पद के लिए देव रत्न नागपाल और अशोक नागपाल, उप प्रधान के लिए राधेश्याम खुंगर और एस अग्घी, सचिव पद के लिए परमबीर धींगड़ा और एमएल अग्घी और कैशियर के लिए नंद गोपाल गौरी और वाईएल मिगलानी मैदान में थे। इसके अलावा तीन कार्यकारिणी सदस्यों के लिए छह लोग चुनाव मैदान में रहे। जिसमें बलराज नंदवानी, भीम सेतिया, धर्मबीर बतरा, केसी नागवाल, नवीन गुलाटी और नितिन धींगड़ा शामिल थे।

पाक के लैय्या में भी चल रहे हैं स्कूल
लैय्या बिरादरी शिक्षा के मामले में शुरू से ही जागृत है। पाकिस्तान के लैय्या में वर्ष 1910 को स्कूल शुरू किया था और आज भी वहां इस नाम से स्कूल चल रहा है।

बंटवारे के समय ये लोग पानीपत में भी आ गए। यहां पर वर्ष 1952 में ही आईबी एल स्कूल शुरू कर दिया। इसके बाद संस्था लगातार बढ़ती चली गई और फिर आईबी कालेज और आईबी पब्लिक स्कूल शुरू कर दिया।
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पानीपत के अलावा पूरे प्रदेश में वंशज
लैय्या बिरादरी के लोग देश बंटवारे के समय भारत में आए थे। ये पानीपत समेत बहादुरगढ़, झज्जर, जींद, दुजाना, कलानौर और काहनौर में आकर बस गए।

इसके बाद ये लोग यहीं पर विकसित होते चले गए। पानीपत में लैय्या बिरादरी की संख्या में 55 सौ के करीब थी। जो आज बढ़कर करीब 25 हजार तक पहुंच गई है।  

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