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नहीं चली लारी, भटकती रही सवारी

Thu, 14 Nov 2013 10:53 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत में हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के बैनर तले रोडवेजकर्मियों ने लगातार दूसरे दिन पूरी तरह से चक्का जाम रखा। बस नहीं चलने पर जहां यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं रोडवेज डिपो को लाखों का फटका लगा।
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रोडवेज यूनियन ने डिपो परिसर में सरकार विरोधी नारेबाजी की और 3519 प्राइवेट परमिटों को वापस लेने की मांग की। इस दौरान डिपो पर प्रशासन और पुलिस की टीम तैनात रही।

हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी ने वीरवार को अपनी मांगों को लेकर चक्का जाम कर दिया। वीरवार को रोडवेज यूनियनों ने मिलकर प्रदेश में जारी 3519 प्राइवेट परमिटों को वापस लेने के साथ अन्य मांगों को लागू करने की मांग की। रोडवेज यूनियनों ने डिपो के एक नंबर गेट पर परिसर में सरकार के प्रति रोष व्यक्त किया और जमकर नारेबाजी की।
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हड़ताली कर्मियों को तालमेल कमेटी के सदस्य आजाद सिंह मलिक, अनूप सिंह सहरावत, वीरेंद्र धनखड़ और जसबीर अंतिल ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में 3519 मार्गों के प्राइवेट परमिट दे रही है, जबकि प्रदेश की जनता प्राइवेट परमिट नहीं चाहती। यूनियन जनता के हक की लड़ाई लड़ रही है और इसमें जनता का पूरी तरह से समर्थन है।

जिले के 14 हजार समेत प्रदेश के लाखों लोगों ने हस्ताक्षर अभियान में शामिल होकर इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि रोडवेज यूनियन की दो दिन की हड़ताल पूरी तरह से सफल रही है और मार्ग पर रोडवेज की एक भी बस नहीं उतर सकी। प्रदर्शन का संचालन महाबीर और चरण सिंह ने किया और अध्यक्षता डिपो की सातों यूनियनों के प्रधानों ने संयुक्त रूप से किया।

इस मौके पर रणबीर शर्मा, सतीश पंवार, सुलतान लठवाल, जसबीर, सतबीर सिंह, विजय कुमार, रामदिया और राकेश कुमार मौजूद रहे।

दो दिन में बीस लाख का नुकसान
पानीपत डिपो के कर्मचारियों ने दो दिन तक लगातार चक्का जाम रखा। वे बुधवार को ट्रेड यूनियनों के समर्थन में हड़ताल पर थे और वीरवार को अपनी मांगों के लिए हड़ताल पर रहे। यूनियन पदाधिकारियों की मानें तो पानीपत डिपो की एक दिन में करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। दो दिन की हड़ताल में डिपो को बीस लाख का फटका लगा है।

नहीं चली एक भी बस
पानीपत डिपो में 124 बसें हैं और यहां से दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच में करीब 1500 बसों के चक्कर लगते हैं। दो दिन की हड़ताल में यहां से रोडवेज की एक भी बस नहीं गुजर सकी। रोडवेज के जानकारों की माने तो पानीपत जीटी रोड पर है और यहां से हर एक मिनट में बसें आती-जाती हैं।

यात्री दिनभर रहे बेहाल  
रोडवेज यूनियनों की हड़ताल के चलते यात्री दूसरे दिन भी परेशान रहे। उनको बस नहीं मिलने के बाद ट्रेनों में मशक्कत कर आना-जाना पड़ा। कुछ यात्रियों को तो ट्रेन भी नहीं मिल सकी। यात्री दिनभर बस स्टैंड के बाहर और सामने समेत चौक और चौराहों पर खड़े रहे। उनको दूसरे प्रदेशों और प्राइवेट वाहनों का सहारा लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।

इसके लिए भी यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। दिल्ली जा रहे दीपक और आशुतोष ने बताया कि वे कई घंटे से बस स्टैंड के बाहर खड़े हैं। लेकिन उनको रोडवेज की एक भी बस नहीं मिली। वे बसों को लेकर काफी परेशान हैं और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।

ये हैं प्रमुख मांग
3519 मार्गों के प्राइवेट परमिट रद्द किए जाएं।
रोडवेज का अलग से भर्ती बोर्ड गठित हो।
10 हजार नई बसों को शामिल किया जाए।
कर्मियों को पंजाब की तर्ज पर वेतन मिले।
बोनस एक माह के वेतन के समान मिले।
कच्चे कर्मी ज्वाइनिंग तिथि से स्थायी हों

वर्जन
कर्मचारी यूनियन अपनी मांगों के लिए दो दिन की हड़ताल पर रही। इस दौरान डिपो की बस नहीं चल सकी। उन्होंने अपने स्तर पर कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन वे नहीं माने। यूनियन की हड़ताल खत्म हो गई है और शुक्रवार को बसें फिर से सड़क पर दौड़ेंगी। कर्मचारी यूनियनों की मांग पर सरकार और निदेशालय स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। हड़ताली कर्मियों पर निदेशालय के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी।
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सुलतान लाठर, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, पानीपत
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