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अजीजुल्लापुर में अवैध निर्माण तोड़ने पहुंची टीम, विरोध के बाद बैरंग लौटी

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पानीपत। गांव अजीजुल्लापुर में अवैध निर्माण तोड़ने पहुंची जेसीबी के आगे बैठकर विरोध जताती हुई मह - फोटो : Panipat
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हाई कोर्ट के आदेश पर निगम के अधिकारी सोमवार को चार जेसीबी मशीनों और टीम के साथ गांव अजीजुल्लापुर में 43 अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए पहुंचे। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। स्थानीय लोगों ने जन प्रतिनिधियों से मदद मांगी तो केवल सांसद के फोन पर आयुक्त ने लोगों को दो दिन का समय दिया है। इसके बाद फिर से कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। करीब चार घंटे तक यहां हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा।
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गांव में कार्रवाई के लिए गई टीम का स्थानीय महिलाओं ने विरोध किया। वे जेसीबी मशीन का रास्ता रोक कर जमीन पर ही बैठ गई। कुछ महिलाओं ने तो अपनी कुर्सियां तक जेसीबी के आगे बिछा ली। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ये कार्रवाई करेगा तो पहले उन्हें उनकी लाशों से गुजरना होगा। वहीं एक युवक ने गैस सिलेंडर निकालकर खुद को आग लगाने की धमकी दी। प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे समझाया बुझाया। एक बार फिर से निगम व प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव के लोगों को खुद अपने निर्माण हटाने की मोहलत दी है। वहीं इससे पहले भी निगम अमला यहां पहले भी कार्रवाई करने के लिए आ चुका है लेकिन पहले भी इसी तरफ अधिकारियों को बगैर कार्रवाई के बैरंग लौटना पड़ा था। इस मौक पर निगम से एक्सईएन जेपी वधवा, एक्सईएन प्रदीप कल्याण, एक्सईएन नवीन सहरावत, एमई जगबीर मलिक, एमई अजीत गर्ग, एमई कुलभूषण, भवन निरीक्षक दलबीर सिंह, जेई मनोज, कानूनगो विरेंद्र, गजे सिंह कानूनगो, नायब तहसीलदार अनिल कौशिक, एडीए व ईओ शिव कुमार शामिल रहे।
ये था मामला-
गांव अजीजुल्लापुर निगम क्षेत्र के अधीन है। यहां के एक तालाब जो निगम की जमीन है, पर कुछ लोगों ने अवैध निर्माण कर अपने मकान बना लिए हैं। अब एक शिकायत की सुनवाई पर हाई कोर्ट के आदेशों पर निगम प्शासन व प्रशासनिक अमला ड्यूटी मजिस्ट्रेट व पुलिस के साथ सोमवार को इन अवैध निर्माणों को तोड़ने पहुंचा। भनक लगने पर ग्रामीणों ने प्रशासन को रास्ते में ही घेर लिया और प्रदर्शन किया। चार घंटे के तनाव पूर्ण हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद सांसद ने आयुक्त को फोन किया। इस पर आयुक्त ने टीम को फोन कर संबंधित ग्रामीणों को दो दिन का समय दिया है, जिसमें उन्हें अपने निर्माणों को खुद हटाना होगा।
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एक ने लिया कोर्ट से स्टे आर्डर
अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने गई टीम के पास 43 लोगों के खिलाफ नोटिस थे, जिन पर निगम का पीला पंजा चलना था। निगम के चेतावनी के बाद ही 43 में से एक ने कोर्ट की शरण लेकर इस कार्रवाई के खिलाफ स्टे आर्डर ले लिया था। निगम के अनुसार स्टे मिलने के बाद वे उस पर कार्रवाई नहीं कर पाए अब केवल 42 मकानों पर ही कार्रवाई की जानी थी।
आठ माह पहले भी एक माह का समय देकर बैरंग लौट चुका है अमला
इससे पहले भी एक बार करीब 8 माह पहले पुलिस दलबल के साथ प्रशासनिक व निगम अधिकारी ये अवैध कब्जा छुड़वाने गए थे। उस समय भी लोगों ने इस निगम कार्रवाई का जमकर विरोध किया था। जिसके बाद निगम को बैरंग लौटना पड़ा था। उस समय भी निगम अधिकारियों ने एक माह में खुद अवैध कब्जे हटाने का समय दिया गया था।
कई जन प्रतिनिधि पहुंचे
जिस समय लोग निगम व प्रशासनिक अमले का विरोध कर रहे थे, तो उन्होंने अपने जन प्रतिनिधियों को भी मौके पर बुलाकर मदद मांगी, जिस पर पार्षद, पूर्व मेयर व कई अन्य जन नायक भी मौके पर पहुुंचे, लेकिन प्रशासनिक अमला पीछे नहीं हटा। उन्होंने सांसद को फोन किया, जिसके बाद उन्होंने आयुक्त को फोन कर लोगों को समय दिलवाया है। हालांकि आयुक्त ने इस बात से मना कर दिया कि इस कार्रवाई में सांसद का कोई हस्तक्षेप रहा है।
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