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निगम हाउस की मीटिंग, चला हाईवोल्टेज ड्रामा विधायक और पार्षदों ने दिए भ्रष्टचार के सबूत

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फोटो-39 से 45
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स्लग :
लूट, भ्रष्टाचार और चोर बाजारी का अड्डा बना नगर निगम पानीपत: सदन
हेडलाइन:
नौ माह बाद हुई निगम हाउस की मीटिंग में 4 घंटे चला हाईवोल्टेज ड्रामा, विधायक और पार्षदों ने दिए भ्रष्टचार के सबूत
- 8.63 करोड़ की पेमेंट चार दिन में बैक डेट में साइन करके दी, अब होगा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज
- एक करोड़ के दो टेंडर ऐसे मिले जिनमें महज 21 दिन में ही दिखा दिया पूरा काम और कर दी पेमेंट, होगी एफआईआर
- इंडस्ट्रियल एरिया में हुडा के दो हजार गज का एजेंडा आया, किसी को जानकारी तक नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। नगर निगम हाउस की मीटिंग सोमवार को लघुसचिवालय में 9 माह बाद आयोजित की गई। जिसमें मौजूद तकरीबन सभी जन प्रतिनिधियों ने निगम अधिकारियों के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। विधायक समेत पार्षदों ने भी भ्रष्टाचार के सबूत सबके सामने रखे। सब ने खुलेआम कहा कि नगर निगम लूट, भ्रष्टाचार और चोर बाजारी का अड्डा बन चुका है। दोपहर तीन बजे से लेकर शाम सात बजे तक चली बैठक में निगम में भ्रष्टाचार का मुद्दा गूंजता रहा। बैठक में विधायक ने निगम अधिकारियों द्वारा बैक डेट में साइन करवाकर साढ़े आठ करोड़ की पेमेंट बांटने का खुलासा किया, जिस पर सदन ने संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की। वहीं, महज 21 दिन में करीब एक करोड़ के दो टेंडरों के काम को कागजों में पूरा दिखा पेमेंट करवाने का मामला भी सामने आया, इस पर भी पुलिस में मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके साथ जेबीएम कंपनी पर सभी पार्षदों ने हमला करते हुए जुर्माना लगाने की अपील की। वहीं, अंजलि शर्मा ने दूसरे पार्षद पर भ्रष्टाचार के आरोप तक जडज दिए।
बैक डेट में साइन करवा बांटी साढ़े 8 करोड़ की पेमेंट : विज
शहरी विधायक प्रमोद विज ने सदन में दस्तोवज दिखाते हुए कहा कि 4 से 8 जून के बीच निगम चीफ अंकाउट अफसर व आयुक्त के ट्रांसफर हुए थे। नए चीफ अंकाउट अफसर व निगम आयुक्त के आने से पहले और इन अधिकारियों के ट्रांसफर के बाद फर्जी तरीके से अधिकारियों ने 8.63 करोड़ की पेमेंट कर दी। इसमें निगम की चीफ अकाउंट अफसर, एसई, कमिश्नर व एक्सईएन लेवल के अधिकारी तक शामिल थे, जिन्होंने अपनी ट्रांसफर के बाद वर्क आर्डरों के बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए। अब निगम इस पेमेंट से संबंधित सभी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करवाएगा। हालांकि तत्कालीन एसई रहे रमेश बागड़ी ने उन पर लगे सभी आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा कि ये काम उनके समय के थे।
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21 दिन में बिना काम किए कागजों में पूरा दिखाया काम
विधायक प्रमोद विज ने दूसरे मामले में कागज दिखाते हुए कहा कि वार्ड नंबर 25 में एक आरसीसी नाले के लिए करीब 50 लाख रुपये से आदर्श सोसायटी को 18 नंबर 2019 को टेंडर दिया गया और इसका काम कागजों में 9 दिसंबर 2019 को पूरा भी दिखा दिया गया। जबकि इसके सैंपल 29 नंवबर को लिए जाते हैं और इसकी रिपोर्ट 14 दिसंबर को आती है। 19 जनवरी को थर्ड पार्टी कहती है कि काम 60 प्रतिशत पूरा हुआ है, तो पार्षद कमेंट करते हैं कि अगर ऐसा है तो ठेकेदार की पेमेंट कर दी जाए। जबकि इससे पहले ही काम को कागजों में पूरा दिखाकर पेमेेंट तक करवा ली जाती है। उन्होंने बताया कि बिल्कुल ऐसा ही टेंडर इन्हीं तारीखों को वार्ड 24 के लिए लगाया गया और इसी तरह इसकी भी पेमेंट करवा ली गई।
साढ़े 6 करोड़ के एससी कांपोंनेंट फंड का नहीं लगा पता: कटारिया
अशोक कटारिया के सवालों से भी निगम अधिकारी चक्कर में पड़ गए ओर उनके सवालों के जवाब तक नहीं दे पाए। अशोक कटारिया ने फरवरी माह में एससी कांपोंनेट फंड के आए करीब साढ़े 6 करोड़ रुपयों की जानकारी मांगी, जो निगम अधिकारी उपलब्ध नहीं करवा पाए। उन्होंने कहा कि ये फंड फरवरी माह में आया था और इसमें से उनके सामने निगम ने एक करीब 15 लाख रुपये की पेमेंट भी कर दी, इसके बाद इस फंड को कहां लगाया गया इसका कुछ अता पता नहीं है।
सिंचाई विभाग से 80 हजार ले गए जेबीएम अधिकारी और कूड़ा भी बेच दिया
वार्ड नंबर सात के पार्षद अशोक कटारिया ने कहा कि जेबीएम अधिकारियों ने सिंचाई विभाग के जेई से कूड़ा उठान के नाम पर 80 हजार रुपये ले लिए और यह कूड़ा एक रुपये किलो के हिसाब से निगम से भी वसूल किया गया। उन्होंने जेबीएम कंपनी पर कड़े प्रहार करते हुए कहा कि ये कंपनी शहर को लूट रही है। निगम में चोरबाजारी हो रही है। हम ऐसे लूट और चोरबाजारी नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए हमें इस्तीफा तक क्यों न देना पड़ जाए।
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पार्षद अंजलि शर्मा ने दूसरे पार्षद पर लगाए भ्रष्ट होने के आरोप
हाउस की मीटिंग मेबव् वार्ड नंबर तीन की पार्षद अंजलि शर्मा ने वार्ड नंबर दो के पार्षद पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के आरोप तक लगा दिए। उन्होंने कहा कि परशुराम कॉलोनी उनके वार्ड में पड़ती है, जबकि दूसरे पार्षद उनके वार्ड के विकास कार्यों में दखल अदाजी करने पहुंच जाते हैं। उनसे वार्ड के लोग भी खफा है, जिन्हें वे साथ लेकर आई हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये कॉलोनी उनके वार्ड में पड़ती है तो निगम इसका साक्ष्य दें। इस बात को सदन में बीच बचाव करते हुए पार्षद को दूसरे पार्षद पर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करने की नसीहत दी। वहीं, कॉलोनी के लोगों से भी मिलने से मना कर दिया गया।
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