नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स में 30 प्रतिशत छूट देने के बाद भी शहरवासियों ने प्रॉपर्टी टैक्स में महज 12 करोड़ रुपये की अदायगी की।
यानी शहर में 1.40 लाख की यूनिटों पर बनने 130 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स के दस प्रतिशत से भी कम। इतना कम प्रॉपर्टी टैक्स आने के बाद नगर निगम की सांसें फूल गई हैं।
ऐेस में विकास कार्यों को लेकर अभी से जोड़तोड़ शुरू हो गया है। विशेषज्ञ प्रॉपर्टी टैक्स के कम आने पर शहर के विकास पर सीधे विपरीत असर पड़ने की बात कह रहे हैं। हालांकि इस बार का प्रॉपर्टी टैक्स गत वर्ष से करीब तीन गुना अधिक बताया जा रहा है।
नगर निगम के अंतर्गत शहर में रिहायशी व कॉमर्शियल करीब 1.40 हजार यूनिट हैं। इन यूनिटों का करीब 130 करोड़ रुपये प्रॉपटी टैक्स बनता है। नगर निगम हर साल इसे लेता है।
नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स ज्यादा लाने के लिए 31 दिसंबर तक विशेष छूट भी दी थी। इसके चलते नगर निगम में 31 दिसंबर तक करीब 12 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में आ सके।
नगर निगम द्वारा शहर के टॉप सौ लोगों की सूची तैयार की थी, जिन्हें लाखों में प्रापर्टी टैक्स बनाता था। इसके लिए बिल तैयार कर लोगों को भेजे भी गए थे, लेकिन टॉप सौ में से भी दस प्रतिशत भी लोगों ने प्रापर्टी टैक्स जमा नहीं कराया।
ये भी रहा टैक्स कम जमा होने का कारण
शहरवासियों की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स जमा न करवाने का कारण शहर में विकास कार्यों कार्यों के न होने तथा निगम द्वारा एक साथ हजारों-लाखों रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स भेजना रहा है।
विकास कार्यो की मांग को लेकर शहरवासियों ने कई बार प्रॉपटी टैक्स बिल जलाकर रोष भी व्यक्त किया गया। वहीं जिन्हें हजारों-लाखों रुपए प्रॉपर्टी टैक्स भेजे गए है इनमें से कुछ ऐसे लोग भी जिनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। इस कारण वह प्रॉपटी टैक्स जमा करवाने में असमर्थ है। दिसंबर महीने में टैक्स जमा करवाने के दौरान ऐसे में लोगों ने नगर निगम मेयर से मिलकर टैक्स माफ करने की गुहार लगाई थी।
सरकार ने ऐसे दी थी प्रॉपटी टैक्स में छूट
सरकार की और से पहली बार जुलाई महीने में नगर परिषदों की वित्तीय हालत सुधारने शहरी लोगों को राहत देने के लिए वर्ष 2010-11 से वर्ष 2012-13 के बकाया प्रॉपटी टैक्स का 31 अगस्त तक एकमुश्त भुगतान करने पर 30 प्रतिशत की छूट देने का प्रावधान किया था।
इसके अलावा वर्ष 2010 से वर्ष 2014-15 तक के बकाया प्रॉपर्टी टैक्स पर ब्याज छूट देने का भी प्रावधान किया था। बाद में सरकार ने फिर समयावधि में बढ़ोतरी की। इस बार पांचवी बार सरकार ने फिर प्रॉपटी टैक्स के एकमुश्त भुगतान करने पर छूट देने का प्रावधान किया था। लेकिन इस अवधि तक भी ज्यादातर लोग प्रापर्टी टैक्स नहीं भर पाए हैं।
अब 48 प्रतिशत अधिक प्रॉपटी टैक्स चुकाना होगा
सरकार द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने के लिए पांच बार छूट देने के बाद शहरवासियों ने प्रॉपटी टैक्स जमा करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब बिना छूट के ही टैक्स जमा करवाना पड़ेगा। वहीं 31 मार्च 20166 तक टैक्स जमा न करवाने पर 48 प्रतिशत अधिक प्रॉपर्टी टैक्स चुकाना होगा।
शहर के विकास कार्यों पर सीधा पड़ेगा असर
नगर निगम द्वारा शहर में गली निर्माण कार्य करवाने, नए भवन का निर्माण करवाने आदि विकास कार्यों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। नगर निगम द्वारा अगर प्रॉपटी टैक्स के 130 करोड़ रुपये प्राप्त किए जाते हैं तो इससे विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद थी।
नगर निगम ने करीब 12 करोड़ प्रॉपटी टैक्स प्राप्त किया है। लोगों से अपील है कि सभी अपना प्रॉपटी टैक्स जमा कराएं। अगर किसी का गलत बिल बना या कोई समस्या है तो शिकायत कर सकता है। यह सब शहर के विकास में लगता है। निगम के पास प्रॉपर्टी टैक्स नहीं आएगा तो विकास नहीं हो पाएगा।
अश्विनी मैंगी, संयुक्त आयुक्त नगर निगम पानीपत।