शहर में नया मेयर बनने के बाद भी अभी तक हाउस की एक भी बैठक नहीं हुई है। शायद पार्षदों व मेयर की अभी तक पावर की तलाश भी अधूरी है। जिससे एक बार फिर पार्षदों व जिला प्रशासन की राजनीति शहर के विकास में बाधा बन रही है।
शहर में विकास के मुद्दों पर कभी पार्षद सहमत नहीं हैं तो कभी प्रशासन के पास समय की कमी का बहाना है। मामला चाहे जो भी हो लेकिन निगम के चुनाव के पिछले करीब तीन सालों से शहर का विकास शून्य रहा है। जिसका खामियाजा शहर की जनता को ही भुगतना पड़ रहा है।
शहर में विकास के नाम पर पिछले तीन सालों में पार्षदों ने किसी भी मुद्दे पर अपनी सहमति नहीं दिखाई है। जिससे हर बार शहर का विकास राजनीति का शिकार हुआ है। पिछले तीन सालों में दूसरे मेयर का चुनाव करने के बाद भी शहर के विकास को कोई गति नहीं मिली है।
पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह करीब ढाई साल तक पावर तलाशते रहे। अंत में उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ा। उसके बाद निगम की कमान संभालने आए मेयर सुरेश वर्मा भी अभी तक विकास के नाम पर शहर को कोई नई दिशा नहीं दे पाए हैं।
सुरेश वर्मा के मेयर बनने के बाद पार्षद करीब तीन माह से हाउस की बैठक करवाने की बात कह रहे हैं। लेकिन शहर के विकास के लिए प्रशासन के पास समय नहीं है। इसलिए हर बार किसी न किसी बहाने से बैठक को टालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन की बेरुखी व पार्षदों की राजनीति का असर शहर के विकास पर पड़ा है।
निगम के बनने के बाद शहर में आज तक कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है। हाउस की बैठक में जिन मुद्दों पर पार्षदों ने अपनी मोहर लगाई थी। निगम प्रशासन ने आज तक किसी भी मुद्दे पर काम नहीं किया है। जब हाउस की बैठक में पास हुए मुद्दों पर काम नहीं होता तो फिर बैठक करने का भी क्या फायदा है।
मंजू कादियान, पार्षद वार्ड-14।
शहर में विकास कार्यों के लिए वह हर समय तैयार हैं। लेकिन बैठक करवाने या हाउस की बैठके के मुद्दों पर काम करना तो निगम प्रशासन का काम है। शहर के इस समय जो हालात हैं। वह किसी से छिपे नहीं हैं, लेकिन फिर भी वे अपने स्तर पर वार्ड में विकास कार्य करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
दुष्यंत भट्ट, पार्षद वार्ड-24।
नगर निगम एक्ट के मुताबिक हाउस की बैठक हर महीने होनी चाहिए। जिसमें हर माह शहर में हुए विकास कार्यों की समीक्षा करनी होती है। लेकिन जब तीन साल पहले बैठक में पास हुए मुद्दों पर कोई काम नहीं हुआ तो फिर बैठकों में समय बर्बाद करने भी क्या आवश्यकता है।
भूपेंद्र सिंह पूर्व मेयर नगर निगम पानीपत।
हाउस की बैठक में पास हुए सिर्फ एक मुद्दे पर काम हुआ है। वह निगम पार्षदों के घर के बाहर बोर्ड लगाने का था। वह भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है। कई पार्षद तो उसमें भी धांधली का आरोप लगा रहे हैं। बाकि काम निगम अधिकारियों ने अपनी मर्जी से करवाए हैं। जिसमें पार्षदों की कोई राय नहीं ली गई है। लेकिन उसके बाद भी वह शहर में विकास के मुद्दे पर किसी भी समय बैठक के लिए तैयार हैं।
अशोक कटारिया, पार्षद वार्ड- 10।
हाउस बैठक करवाने के लिए जिला उपायुक्त से बात की है। जल्द ही हाउस की बैठक कराई जाएगी। पंचायती चुनाव में अचार संहिता के चलते बैठक में देरी हुई है। लेकिन अब जल्द ही शहर के विकास के लिए नई रणनीति बनाई जाएगी।
सुरेश वर्मा, मेयर नगर निगम पानीपत।