पानीपत। औद्याेगिक नगरी में फैक्टि्रयों में सुरक्षा के मापदंड को अनदेखा किया जा रहा है। रिहायशी क्षेत्र की तंग गलियों में फैक्टरी बना ली गई हैं। यहां दमकल की गाड़ी पहुंच पाना भी मुश्किल है। कई फैक्टि्रयों में आग पर काबू पाने के लिए पानी और रेत समेत दूसरे प्रबंध भी नहीं हैं। कई जगह फायर फाइटिंग सिलिंडर एक्सपायर हो चुके हैं या आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं।
दमकल विभाग के अनुसार, करीब 60 प्रतिशत फैक्टरियां बिना एनओसी के संचालित हो रही हैं। शहर समेत जिले में करीब 37 हजार फैक्टरी हैं। पांच औद्योगिक सेक्टरों में करीब 10 हजार फैक्टरी हैं। बाकी 27 हजार फैक्टरी शहर के आवासीय और दूसरे क्षेत्र में बनाई गई हैं। दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में आग लगने से हादसे के बाद पानीपत में होटल और कोचिंग सेंटर के बाद फैक्टि्रयों में आग लगने पर नुकसान को रोकने के लिए पड़ताल की।
बबैल रोड पर एक तंग गली में दोनों तरफ फैक्टरी बनाई गई हैं। गली की चौड़ाई मुश्किल से 15 फीट है। ऐसे में किसी प्रकार की घटना होने पर दमकल गाड़ी का निकल पाना मुश्किल होगा।
बबैल रोड की एक फैक्टरी में गेट से दाखिल होते ही दो फायर फाइटिंग सिलिंडर लगे मिले। इनमें एक दो महीने पहले एक्सपायर हो चुका है। दूसरे का एक महीना बाकी है। आग को प्राथमिक रूप से रोक पाना भी मुश्किल होगा।
फैक्टि्रयों में लगातार हो रही घटना
डाडौला के बापौली रोड पर स्थित गुप्ता इंटरनेशनल फैक्टरी में 26 मार्च को आग लग गई थी। फैक्टरी का पूरा सामान जल गया था। पांच फायर स्टेशनों की 10 गाड़ी मौके पर पहुंची थी। दमकल विभाग की 10 टीमों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। सेक्टर-25 पार्ट-2 में स्थित एक फैक्टरी में 15 अप्रैल को आग लगी थी।
फैक्टरी मालिक एनओसी पहले ही लेता है। कई बार साथ के साथ रिन्यू नहीं हो पाती हैं। औद्योगिक सेक्टर की मांग की गई हैं। इसके मिलने के बाद शहर की रिहायशी क्षेत्र से फैक्टरी बाहर निकल सकती हैं। -विनोद धमीजा, प्रधान, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर।
दमकल विभाग समय-समय पर फैक्टरी की जांच करता है। इसमें किसी प्रकार की कमी मिलने पर कार्रवाई की जाती है। आग लगने पर भी फैक्टरी की एनओसी की जांच कराई जाएगी। -गुरमेल सिंह, जिला दमकल अधिकारी।
बबैल रोड पर संकरी गलियों में बनी फैक्टरी। संवाद