पानीपत। गेहूं के सीजन में मौसम ने एक बार फिर प्रशासन के दावों की पोल खोल दी। मंडियों में किसानों के साथ एजेंसियों का खरीदा करीब दो लाख मीट्रिक टन गेहूं भीग गया। तिरपाल से गेहूं ढकने के दावे भी धरे रह गए। किसान मंडी में आकर फिर से बेबस नजर आए। वहीं प्रशासन के दावे कुछ भी मदद नहीं कर पाए।
जिले में गेहूं खरीद के लिए 12 मंडी व केंद्र बनाए गए हैं। मंडियों में 266892 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 185317 मीट्रिक टन की खरीद की है। एजेंसियों ने करीब 22109 मीट्रिक टन का उठान किया है। यह खरीद का 21 प्रतिशत है। एजेंसियों के आगे न आने पर मंडियों में गेहूं के ढेर लग गए हैं। शुक्रवार को मौसम के एक साथ करवट लेने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। दोपहर बाद तीन बजे एक साथ बूंदाबांदी शुरू होने से किसानों ने गेहूं की ढेरियों को ढकना शुरू कर दिया।
एजेंसियों ने मंडी में खुले में रखे कट्टों को ढका। पानीपत मंडी में 46061 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई। समालखा में सबसे अधिक 72426, मतलौडा 49607, इसराना 35687, बापौली 22328, बाबरपुर 14606 व सनौली मंडी में 3412 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई। उरलाना खरीद केंद्र पर 2191, अहर में 6868 और बबैल में 3353 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। समालखा अनाज मंडी में 16, पानीपत में 24, इसराना में 40, मतलौडा में 22 और बाबरपुर मंडी में 11 प्रतिशत गेहूं का उठान किया जा सका है।