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भाला न होने पर नवदीप ने बॉल फेंककर किया था अभ्यास

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पानीपत। भाला न होने पर बॉल से अभ्यास करने वाले नवदीप से अब देश को पैरा ओलंपिक में गोल्ड मेडल की आस है। बुआना लाखू के रहने वाले 20 वर्षीय नवदीप के पास अभ्यास के लिए शुरुआत में भाला तक नहीं था। नवदीप को करीब दो साल के लंबे इंतजार के बाद पहला भाला मिला था, जिसकी कीमत करीब 16 हजार रुपये थी। लगातार कामयाबी की ओर बढ़ने पर पिता ने 60 हजार रुपये का दूसरा जैवलिन लाकर दिया। आर्थिक तंगी और कद छोटा होने के बाद भी नवदीप ने कभी हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे, जिसकी बदौलत वह टोक्यो पैरा ओलंपिक का टिकट पा चुके हैं।
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कमर में चोट लगने के कारण छोड़नी पड़ी कुश्ती, फिर संदीप को देख शुरू किया जैवलिन थ्रो
कुश्ती खेलते दौरान नवदीप को कमर में चोट लग गई थी। इसकी वजह से नवदीप को कुश्ती से नाता तोड़ना पड़ा। कुश्ती छोड़ने के कुछ समय बाद नवदीप ने संदीप को जैवलिन थ्रो करते देखा और संदीप ने नवदीप को भाला फेंकना सिखाया और अब नवदीप जैवलिन थ्रो खेल में अपनी अलग ही पहचान बना चुके है।
वर्ल्ड रिकार्ड से अब केवल 50 सेंटीमीटर दूर
नवदीप ने बताया कि वह अपनी कैटेगरी में वर्ल्ड रिकॉर्ड से केवल 50 सेंटीमीटर ही दूर हैं। उनका कहना है कि उनका अभी तक का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 43.78 मीटर है, जो वर्ल्ड रिकॉर्ड से केवल 50 सेंटी मीटर कम है। नवदीप का कहना है कि वह ओलंपिक के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं और टोक्यो ओलंपिक अंडर-20 जैवलिन थ्रो में नया रिकॉर्ड बनाने के साथ साथ गोल्ड मेडल जीतने का भी प्रयास करेंगेेे।
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कम लंबाई होने के कारण साथ नहीं खिलाते थे
नवदीप का कद केवल 4 फुट है जिसकी वजह से उनके गांव के दोस्त व बच्चे उनको बचपन में अपने साथ नहीं खिलाते थे, जिसकी वजह से उनको कई बार बुरा लगता था, लेकिन उनको मन में यही ख्याल रहता था कि वह कुछ अलग करेंगे और अपने देश का नाम रोशन करेंगे। इससे वह छोटा कद होने के बाद भी कभी हार नहीं मानी। नवदीप ने बताया कि उनका कद छोटा होने के साथ साथ वह सही से चल या दौड नहीं पाते थे जिसके लिए उन्होंने कुश्ती खेलना व दौड़ना शुरू किया था। इससे धीरे-धीरे उनके हाथ-पैर मजबूत हो गए थे।
बेटे ने पिता का अधूरा सपना किया पूरा
नवदीप के पिता दलबीर ने बताया कि वह खुद भी एथलीट थे, लेकिन वह नेेशनल से आगे नहीं जा सके। घर की बढ़ती जिम्मेदारियों व बढ़ती उम्र के कारण उनको खेल छोड़ना पड़ा। पिता दलबीर का कहना है कि जो सपना उनका अधूरा रह गया था वह अब उनका बेटा पैरा ओलंपिक में पदक लाकर पूरा करेेगा।
पांच महीने में चोट ठीक होने के बाद की पैरा ओलंपिक की तैैयारी
नवदीप को सबसे पहले कमर में चोट लगी, जिसके कारण उन्होंने कुश्ती छोड़ दिया। 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान भी नवदीप को कमर में चोट लग गई थी, जिससे उभरने में उनको 5 महीने लग गए। फरवरी 2020 में ठीक होते ही नवदीप ने पैरा ओलंपिक की तैयारी की और बेहतकर प्रदर्शन के साथ पैरा ओलंपिक के लिए क्वालिफाई भी किया।
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- ये पदक किए प्राप्त
- 2010 दुबई में हुई विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
-जूनियर व अंडर-20 पैरा नेशनल चैंपियनशिप में चार स्वर्ण पदक।
- 2019 स्विटजरलैंड में हुई पैरा विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
-2021 फरवरी में 43.78 भाला फेंका, जो केवल वर्ल्ड रिकॉर्ड से 50 सेंटीमीटर दूर।
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