संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। रेलवे ट्रैक पर होने वाली दुर्घटनाओं के बाद लोग जहां खून से भरे शवों को देखकर घबरा जाते हैं, वहीं 53 वर्षीय नसीम बिना किसी हिचकिचाहट के पिछले 20 साल से पानीपत में रेलवे ट्रैक से कटे-फटे शवों को उठा रहे हैं। नसीम की हिम्मत ने उन्हें ऐसा काम करने को तैयार किया है। जिसे देखकर सामान्य लोग अपनी नजरें फेर लेते हैं।
महाबीर कॉलोनी के नसीम ने बताया कि अब तक वे हजारों शव अपने हाथों से रेलवे ट्रैक से उठा चुके हैं। कई बार शवों के हालात इतने दर्दनाक होते हैं कि उन्हें एक-एक अंग को समेटकर थैले में रखना पड़ता है। कई बार शव की हालत इतनी खराब होती है कि आसपास खड़े लोग देख भी नहीं पाते लेकिन नसीम अपने काम से पीछे नहीं हटते। कभी-कभी तो दिल भी दहल जाता है लेकिन मजबूरी है। किसी को तो यह काम करना ही होता है। जैसे ही किसी दुर्घटना की सूचना पुलिस थाने में जाती है तो कुछ ही देर बाद उनके पास फोन आ जाता है। उन्हें तुरंत रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर शव उठाना होता है। इस काम के लिए नसीम को प्रति शव करीब 500 रुपये मिलते हैं।
नसीम का मुख्य काम ऑटो रिक्शा चलाना है। जब भी पुलिस से बुलावा आता है उन्हें अपना काम छोड़कर ट्रैक पर पहुंचना पड़ता है। उन्होंने बताया कि 20 साल पहले ऑटो रिक्शा यूनियन के प्रधान ने उनसे इस काम को करने के लिए कहा था। उस समय पैसों की जरूरत के चलते उन्होंने हां कर दी और तब से अब तक यह सिलसिला जारी है। मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले हैं लेकिन 43 साल से वे अपने परिवार के साथ पानीपत की महावीर कॉलोनी में किराए पर रह रहे हैं। परिवार के खर्च और बच्चों की पढ़ाई के लिए वे दिन में रिक्शा चलाते हैं और शव उठाने का काम भी करते हैं। नसीम कहते हैं अब तो आदत सी हो गई है। शुरू-शुरू में मन दुखी होता था। अब समझ आता है कि यह भी इंसानियत की सेवा है।