कोरोना संक्रमण के दौरान ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है, ऐसे दौर में अध्यापिकाओं के साथ माताओं की भूमिका भी अहम हो गई है। जिसे अध्यापिकाओं और माताओं ने संयुक्त रूप से बखूबी संभाला है। अध्यापिकाओं और बच्चों के बीच इस दौरान माताएं एक पुल का काम कर रहीं हैं। ऑनलाइन कक्षा के बाद बच्चों को माताएं अपने तरह से भी विषय को समझा रहीं हैं, जिसमें बच्चे की रुचि और अरुचि का ध्यान रखा जा रहा है। इससे स्कूल बंद होने के बावजूद संयुक्त प्रयासों के चलते शिक्षा की गाड़ी चलती आ रही है। रविवार को मातृ दिवस है, इस मौके पर अमर उजाला, जिनवाणी स्कूल और हेल्पिंग यूथ सोसायटी की सदस्यों के साथ वेबिनार के जरिए शुक्रवार को संवाद का आयोजन किया गया।
मां ही बच्चों की पहली शिक्षक, मां से सीखी बातें बच्चा कभी नहीं भूलता
कोरोना महामारी के दौरान शिक्षिकाओं के साथ ही मां ने पढ़ाई जारी रखने में अहम किरदार निभाया है। पिछले करीब एक वर्ष से स्कूल बंद हैं और ऑनलाइन शिक्षा ही दी जा रही थी। इस दौरान मां की जिम्मेदारी थोड़ी और बढ़ गई। अध्यापकों ने ऑनलाइन कक्षा में पढ़ाकर होमवर्क दिया, लेकिन उसे पूरा कराने की जिम्मेदारी मां ने निभाई। मां से सीखी बातें बच्चा कभी नहीं भूलता।
-नीलम, प्रधानाचार्य, जिनवाणी स्कूल
शिक्षक एक साथ कई बच्चों को पढ़ाता है, पढ़ाने का एक ही तरीका होता है, जिसके जरिए ही बच्चों को सीखना है। ऑनलाइन कक्षाएं भी वास्तविक कक्षाओं से इतर नहीं थीं। एक शिक्षक और पढ़ाने का एक ही तरीका, लेकिन यहां शिक्षा में माताएं अहम रोड अदा करती हैं। वे अपने बच्चे की रुचि और अरुचि के बारे में जानती हैं। वह शिक्षक द्वारा पढ़ाए विषय को अलग तरीके से बच्चे की रुचि के मुताबिक पढ़ाती हैं, जिससे बच्चा जल्दी सीखता है।
-हिना वाधवा, अध्यापिका
लगातार आठ साल से शिक्षण काम कर रहीं हूं, लेकिन कोरोना महामारी के दौर में ऐसा पहली बार देखा, जहां माताएं अपने बच्चों की शिक्षा के स्तर को सुुधारने के लिए लगातार काम कर रहीं हैं। वह शिक्षा के महत्व और मौजूदा स्थिति को बखूबी समझ रहीं हैं। नतीजा ऑनलाइन कक्षाओं के बावजूद बच्चों का प्रदर्शन बेहतर रहा। यह शिक्षक और माताओं के संयुक्त प्रयास से ही संभव हो सका।
-अंजू शर्मा, अध्यापिका
ऑनलाइन कक्षाओं के बावजूद बच्चों को पौधरोपण और पर्यावरण के संरक्षण के बारे में बताया जाना बेहद जरूरी है। पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा उन्हें अपनी मां से मिली, जिसे ऑनलाइन कक्षा के दौरान मैंने अपने विद्यार्थियों को दिया। जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इससे जोड़ा जा सके। इस काम में विद्यार्थियों की माताओं से भी सहयोग मिला।
-सिमरन कुमारी, अध्यापिका
अध्यापक के तरीके के साथ अपने तरीके से भी समझाते हैं : मोनिका
ऑनलाइन क्लास हो जाने के बाद अगर बच्चों को किसी विषय में समस्या रह जाती है तो अपने तरीके से समझाते हैं। मेरी मां ने हमेशा मुझे सिखाया है कि विषय से भागने की जगह उसे समझना और सीखना चाहिए, यही अपने बच्चों को भी सिखा रहीं हूं।
मोनिका, गृहिणी
अपने भाई-बहनों की पढ़ाई में मदद करती हूं : स्वाति
स्वाति ने बताया कि मां की जगह मैं अपने भाई और बहन को पढ़ाती हूं। अध्यापक एकसाथ 30 से 40 बच्चों को पढ़ाते हैं, जिससे वह एक पर फोकस नहीं कर सकते, ऐसे में इस दौरान में माताओं और बड़े भाई-बहनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बड़े भाई-बहन भी अपने से छोटों की शिक्षा के लिए मां की भूमिका निभा सकते हैं।