पानीपत। गांव उग्राखेड़ी निवासी मोहित के पिता दिनेश व मां कविता।
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पानीपत। रूस के हमले के बाद से सैंकड़ों भारतीय विद्यार्थी यूक्रेन में ही फंस गए हैं। गांव उग्राखेड़ी के रहने वाले एमबीबीएस के छात्र मोहित भी रूस-यूक्रेन बॉर्डर के पास सुमी में फंसा हैं। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पर होने की वजह से यहां बम बारी बहुत ज्यादा है। पिछले चार दिन से कभी बंकर तो कभी हॉस्टल के बेसमेंट में छिपकर जान बचा रहे हैं। मां कविता की बस एक ही रट है कि बेटे को लेकर आओ।
पिता दिनेश ने बताया कि बेटे को इस वर्ष के अंत तक भारत आना था। उन्होंने फ्लाइट की टिकट भी करा दी थी, लेकिन युद्ध शुरू होने से बेटा यूक्रेन में फंस गया है। उन्होंने बताया कि सरकार कह रही है कि वहां से निकलो और बॉर्डर पर आओ लेकिन छात्र 1400 किलोमीटर की दूरी तय करके कैसे जाएंगे। भारतीय दूतावास से लोग वहां पहुंच नहीं पा रहे। बेटे से आखिरी बार रविवार को बात हुई थी। उस समय वह काफी परेशान था। बंकर में छिपा था। उसने बताया था कि खाना नहीं मिल रहा है। टॉयलेट जाना तक मुश्किल है। इस दौरान बम गिरने की आवाज आई और सायरन बज गया। तब से बेटे से बात नहीं हो सकी है।
उधार लेकर कराई थी फ्लाइट की टिकट, रद्द हुई
पिता दिनेश ने बताया कि 25 दिसंबर को बेटे को आना था। इसके लिए उधार लेकर पहले ही टिकट करा दी थी। युद्ध छिड़ने के साथ ही टिकट भी रद्द हो गई है, जिसके रुपये भी रिफंड नहीं हुए हैं। वीडियो कॉल कर मोहित ने माता-पिता को वहां के हालात बताएं हैं। मां कविता ने बताया कि हॉस्टल के बेसमेंट में बने बंकर से सामान लेने के बाहर आना मुश्किल है। सायरन बज रहे हैं, ऐसे में खाने-पीने का सामान भी नहीं है। मोहित की मां भी चार दिन से बामुश्किल ही खाना खा पा रही हैं। वह बेटे से मिलने के परेशान हैं।
पानीपत। गांव उग्राखेड़ी निवासी मोहित व मां कविता विलाप करती हुई।- फोटो : Panipat