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मिल बंद होने के संकेत, किसानों की फूली सांस

Sun, 30 Mar 2014 11:32 PM IST
पानीपत
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जैसे-जैसे पानीपत चीनी मिल के पेराई सत्र समाप्त होने के दिन नजदीक आ रहेे हैं, वैसे-वैसे गन्ना उत्पादक किसानाें की सांसे फूलने लगी हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि पानीपत चीनी मिल का सत्र 20 अप्रैल को खत्म हो जाएगा, इसके साथ ही मिल की पेराई भी बंद हो जाएगी।
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इसके साथ-साथ पड़ोसी चीनी मिल भी इसी तिथि में बंद हो जाएंगी। इस समय जिन पड़ोसी चीनी मिलों की सरप्लस गन्ना डलवाने की जिम्मेदारी लगाई गई हैं, वे भी फिलहाल गन्ना नहीं डलवा रही हैं। ऐसे में किसानों को खेताें में खडे़ अपने गन्ने की चिंता सताने लगी है। स्थिति ऐसे ही चलती रही तो गन्ना उत्पादक किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके विपरित चीनी मिल अभी भी पूरे गन्ना उठाने का दावा कर रही है।

पानीपत चीनी मिल का पेराई सत्र 19 नवंबर, 2013 को शुरू हुआ था। इस बार गन्ने की पेराई का लक्ष्य करीब 27 लाख क्विंटल रखा गया था। मिल की मौजूदा पेराई क्षमता करीब 17 हजार क्विंटल प्रति दिन बताई गई है, लेकिन मौजूदा सीजन में एकाध दिन को छोड़कर बताई गई क्षमता में गन्ने की पेराई नहीं हो पाई है। मौजूदा सीजन में जिले में करीब 65 लाख क्विंटल गन्ने की फसल है। इसमें से 27 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की जिम्मेदारी उठाते हुए पानीपत मिल ने बाकी बचे करीब 38 लाख क्विंटल सरपलस गन्ने की जिम्मेदारी अन्य चीनी मिलों को सौंपी थी।
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अभी भी 20 लाख सरप्लस गन्ना
जिले मेेें सरप्लस गन्ने की बात की जाए तो अभी भी खेतों में करीब 20 लाख क्विंटल सरपलस गन्ना बचा पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान चुहड़ सिंह रावल ने बताया कि मौजूदा सीजन में करीब 38 लाख सरप्लस गन्ना था। पेराई सत्र शुरू होने से लेकर अब तक करीब 18 लाख क्विंटल सरप्लस गन्ना ही लिया गया है। ऐसे में बाकी बचे दिनों में करीब 20 लाख क्विंटल सरप्लस गन्ना कैसे निपटेगा, इसके लिए गन्ना उत्पादक किसानों को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।

पड़ोसी चीनी मिल भी खड़े कर रहे हाथ
शुगर फेड, जिला प्रशासन व मिल प्रशासन ने संयुक्त रूप से अब तक जिन भी चीनी मिलों की जिम्मेदारी लगाई थी, वे अब तक पानीपत का गन्ना लेने से हाथ खड़े ही करती आई हैं। क्षेत्र के किसान भी गन्ने के उठान को लेकर सीजन के दौरान कभी पड़ोसी मिल प्रबंधन अधिकारियों, कभी जिला प्रशासन तो कभी शुगर फेड के चक्कर लगाते फिर रहे हैं। इन सबके बाद भी गन्ना उत्पादक किसानों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही है। गेहूं की कटाई का सीजन शुरू होने के बाद तो गन्ना उत्पादक किसानों की चिंता और भी ज्यादा बढ़ जाएगी।

गन्ना उत्पादक किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। क्षेत्र के खेतों में खड़े गन्ने की पूरी फसल को चीनी मिल लेंगी। पड़ोसी चीनी मिलों से बात की गई है, किसानों का जितना भी सरप्लस गन्ना है उसे हर हाल में लिया जाएगा। किसानों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। चीनी मिल किसानों की दम पर ही चलती है। मिल प्रबंधन किसी भी रूप में किसानों को परेशान नहीं होने देगा।
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हवा सिंह, महाप्रबंधक, पानीपत चीनी मिल
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