महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद विद्यार्थियों के साथ खड़े सभा के सदस्य।
समालखा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बलिदान दिवस पर शुक्रवार को गांधी स्मारक निधि पट्टीकल्याणा गांव आश्रम परिसर में शरीर श्रम पश्चात स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान सभा में पहुंचे अतिथियों द्वारा गांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। न्यासी हेमलता रावत ने बताया कि 1915 में गांधी वापस भारत आए और देश को आजादी के लिए देश वासियों को संगठित करने के कार्य में लग गए। उन्होंने अनेक आंदोलन-अनशन किए। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन किया। वे हमेशा कहा करते थे कि मेरा जीवन ही मेरा संदेश है। उनके प्रयास से देश आजाद हुआ। 30 जनवरी 1948 को बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा में जाते समय उनकी हत्या कर दी गई, उनके मुंह से निकले अंतिम शब्द हे राम थे।
सचिव आनंद कुमार शरण ने बताया कि गांधी ने देश और समाज के लिए अनगिनत कार्य किए जिनके लिए आज और आगे भी गांधी को याद किया जाएगा। गांधी बहुत ही दूरदर्शी थे, उन्होंने जब आंदोलन किया तो वहां पर उग्र भीड़ ने पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया। गांधी ने तुरंत ही अपना आंदोलन वापस ले लिया जिसके लिए उनकी उस समय काफी आलोचना भी हुई लेकिन गांधी ने आंदोलन से प्रेरित देशवासियों का नुकसान न हो इसलिए अपने आंदोलन को वापस लिया। इस मौके पर अजय कुमार, किरण शरण, सुनीता शर्मा, रोशन लाल, गिरिराज, योगेंद्र यादव, प्रसन्न कुमार, संजय पटेल, राहुल, राकेश कौशिक, बिमलेश, मीना, सोना व रिंको मौजूद रहे।