पानीपत। जिले में सोने की ढलाई और आभूषण बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है जिस कारण जिले में बंगाल और महाराष्ट्र के कारीगर काम कर रहे हैं। इनमें बंगाल के करीब 250 और महाराष्ट्र के 30 से अधिक कारीगर शामिल हैं। ये लोग स्थानीय कारीगर की अपेक्षा कम पैसे में काम कर लेते हैं इसलिए इनकी ज्यादा मांग है। इसका फायदा उठाकर कई बार कारीगर सोना लेकर भाग जाते हैं। इससे पहले भी पानीपत में इस तरह की वारदात हो चुकी हैं। कई बार बिना सत्यापन के ही व्यापारी इन्हें रख लेते हैं।
सराफा बाजार में आभूषण बनाने और सोने को ढलाने और टंच निकालने काम काम किया जाता है। महाराष्ट्र के कारीगर टंच निकालने का काम सबसे ज्यादा करते हैं। वहीं बंगाल के कारीगर आभूषण बनाने का काम करते हैं। बंगाल के कारीगर स्थानीय कारीगर की अपेक्षा काम में ज्यादा एक्सपर्ट भी होते हैं। वह दिन में 15 से 18 घंटे तक काम करते रहते हैं। इस कारण स्थानीय कारीगरों के स्थान पर व्यापारी उन्हें आसानी से रख लेते हैं। स्वर्णकार एसोसिएशन के प्रधान संजय वर्मा ने बताया कि जिले में 250 से अधिक बंगाली और 30 से ज्यादा महाराष्ट्र के कारीगर काम कर रहे हैं।
145 ग्राम सोना लेकर भाग गए थे दो कारीगर
जिले में सोना लेकर भागने की वारदात पहले भी हो चुकी है। अप्रैल 2025 में एकता मार्केट में काम मरने वाले दो बंगाली कारीगर 145 ग्राम सोना लेकर भाग गए थे। इससे पहले इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महाराष्ट्र का कारीगर भागने का यह पहला मामला है।
जिले में बंगाल और महाराष्ट्र के कारीगर काम करते हैं। बंगाल के 250 और महाराष्ट्र के 30 से ज्यादा कारीगर हैं। सभी का पुलिस सत्यापन कराया जाता है। महाराष्ट्र के कारीगर के भागने की यह पहली वारदात है।
- संजय वर्मा, प्रधान स्वर्णकार एसोसिएशन पानीपत