जल संरक्षण के लिए बैठक लेते उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया। स्रोत : सूचना विभाग
पानीपत। जिले में भूल लगातार नीचे जा रहा है। कई खंड अति दोहित श्रेणी में आ गए हैं। यहां अनुमान से अधिक पानी का दोहन किया जा रहा है। प्रशासन अब वैज्ञानिक आधार पर भूजल का संरक्षण करेगा। शिमला मौलाना गांव में जल बचाने का कार्य शुरू किया जाएगा। यह कार्य फिलहाल अनुभव के आधार पर होगा, इसके सफल होने पर बाकी गांवों में भी लागू किया जाएगा।
उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने मंगलवार को इसके लिए राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण (नाक्विम) और जल शक्ति जन भागीदारी (जेजेएसबी 2.0) के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि प्रशासन भूजल की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। पानीपत में औद्योगिक इकाइयों के अधिक होने पर स्थिति ज्यादा चिंतनीय है। प्रशासन भूजल की गुणवत्ता व पानी के स्तर को बेहतर करने की दिशा में काम किया जाएगा। यमुना क्षेत्र के अंतर्गत खंडों में भूजल पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है। यहां पर राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण और जल शक्ति जन भागीदारी के तहत एक प्रयोग प्रशासन द्वारा किए जाने पर विचार किया गया, इससे भूजल संकट का स्थायी समाधान करने का प्रयास होगा। जल संरक्षण से जुड़े प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर धरातल पर लागू किया जाएं। किसानों और आमजन को जल बचत के लिए निरंतर जागरूक किया जाए।सिंचाई विभाग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग सहित सभी विभागों के विभागाध्यक्षों ने अपने सुझाव दिए। वैज्ञानिक विद्यानंद नेगी, आयुष केशरवानी व कुलदीप गोपाल भर्तरिया व जल शक्ति जन भागीदारी योजना के तकनीकी विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण के निष्कर्षों, जिला भूजल पुनर्भरण योजना और भास्कराचार्य अनुप्रयुक्त भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बिसैग) द्वारा तैयार ग्राम स्तरीय भूजल पुनर्भरण योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। विशेषज्ञों ने केंद्रीय भूजल बोर्ड के पोर्टल पर उपलब्ध भूजल संसाधन मूल्यांकन, भू-जल स्तर एवं जल गुणवत्ता से संबंधित आंकड़ों तक पहुंच और उनके उपयोग की प्रक्रिया के बारे विस्तार से बताया। इस मौके पर जिला परिषद की सीईओ डॉ. किरण, जन स्वास्थ्य विभाग से कार्यकारी अभियंता करण बहल, कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. देवेंद्र कुहाड़ मौजूद रहे।