पानीपत। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबरदीप सिंह की फास्टट्रैक कोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के एक मामले में दोषी दीपक को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है। उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना जमा न करने पर उसे छह महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
दीपक शादीशुदा था और पहली पत्नी को छोड़कर युवती को शादी करने का झांसा देकर तीन-चार साल तक उसका यौन शोषण करता रहा। युवती के छह-सात महीने की गर्भवती होने पर दीपक उसे छोड़कर भाग गया था। यह घटना उसके धोखे को उजागर करती है।
कोर्ट ने नवजात की डीएनए रिपोर्ट को सजा का मुख्य आधार माना है। युवती ने अगस्त 2024 में थाना चांदनी बाग पुलिस को शिकायत दी थी। उसने बताया कि दीपक ने शादी का झांसा दिया। इसके बाद उसने युवती के साथ भारत नगर और गंगापुरी सड़क स्थित फैक्टरी में संबंध बनाए। दीपक ने आखिरी बार नौ अगस्त 2024 को फोन पर दिल्ली जाने की बात कही थी।
उसने 13-14 अगस्त को लौटकर शादी करने का वादा किया था, जिसके बाद उसका फोन बंद हो गया। पीड़िता ने दीपक को करीब डेढ़ लाख रुपये भी दिए थे। युवती ने अपनी मां को पूरी बात बताई, जिसके बाद उसे जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
थाना चांदनी बाग पुलिस ने 16 अगस्त 2024 को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) एन के तहत प्राथमिकी दर्ज की। पीड़िता की काउंसिलिंग के बाद कोर्ट में उसके बयान दर्ज कराए गए। पुलिस ने 18 अगस्त 2024 को आरोपी दीपक को गिरफ्तार कर लिया था।
डीएनए रिपोर्ट बनी सजा का आधार
पीड़िता ने 26 सितंबर 2024 को एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे और आरोपी दीपक के डीएनए जांच के लिए नमूने एफएसएल मधुबन भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में डीएनए पॉजिटिव आया, जिससे दीपक का अपराध साबित हुआ। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को मामले में दोषी करार देने का मुख्य आधार बनाया।